फतेहाबाद। सीमा क्षेत्र से जिले के पशुओं में आई लंपी पॉक्स स्किन बीमारी को देखते हुए प्रशासन ने अब कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उपायुक्त ने शनिवार को ही अंतरराज्यीय व अंतरजनपदीय से फतेहाबाद जिले में आने वाले मवेशियों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। डीसी ने धारा 144 लागू करके फतेहाबाद में पशु मेले पर भी रोक लगा दी है।
जिले में लंपी पॉक्स स्किन बीमारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अब प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। डीसी ने जिले में लंपी स्किन बीमारी से बचाव के लिए कई निर्णय लिए। पशुओं से भरे वाहन भी नहीं चल सकेंगे। अगर ऐसा होता है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई के आदेेश दिए गए हैं।
ज्ञात रहे कि फतेहाबाद की सीमा पंजाब व राजस्थान से मिलती है। पंजाब से लगते सीमा क्षेत्र में लंपी स्किन का प्रकोप सर्वाधिक है। आदेशों में लंपी से मृत पशुओं को भी सरेआम कहीं भी नहीं फेंका जा सकेगा। उनके शरीर को सही तरीके से डिस्पोज ऑफ किया जाएगा, साथ न ही उनकी खाल उतारी जा सकेगी।
पिछले रविवार को रोक के बावजूद लगा था पशु मेला
ज्ञात रहे कि एक पखवाड़े पहले जब प्रदेश के फतेहाबाद, सिरसा सहित कई जिलों अभी लंपी स्किन रोग फैलना ही शुरू हुआ था तो पशुपालन विभाग के मंत्री जेपी दलाल ने पशु मेले और पशुओं के दूसरे जिलों या प्रदेश में लाने व ले जाने पर रोक लगा दी थी। उससे अगले ही दिन फतेहाबाद के गांव अयाल्की के पास पशु मेला लग गया था। यही नहीं इससे अगले हफ्ते रविवार को भी मेला लगा था। मामला पशुपालन मंत्री के संज्ञान में लाया गया था। अब रविवार को मेला लगने से एक दिन पहले अब डीसी ने भी लिखित में आदेश जारी कर दिए हैं।
ये हैं इस बीमारी के लक्षण
1. इस बीमारी में पशु को तेज बुखार, मुंह से पानी गिरना, भूख नहीं लगना, दूध उत्पादन में गिरावट, पशु के शरीर पर गांठें बनना, जो कि फूट कर जख्म भी बन जाता है।
ये हैं बीमारी के फैलाव के कारण
1. मक्खी-मच्छर व चीचड़ के माध्यम से, संक्रमित पशुओं की लार व दूषित चारा, पानी से फैलता है।
2. संक्रमित पशु के स्वस्थ पशु के संपर्क में आने से भी फैलती है।
ये हैं पशुओं को इस बीमारी से बचाव के तरीके
1. गोशालाएं व पशुपालक संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखें।
2. बीमार पशु का तुरंत पशु चिकित्सक से इलाज शुरू करवाएं।
3. पशुओं के बाडे़ को साफ सुथरा रखें।
4. स्वस्थ पशुओं को फिटकरी या लाल दवा से दिन मे दो बार नहलाएं।
5. बीमार पशुओं को बाहर चरने न लेकर जाए।
6. एक स्थान से दूसरे स्थान पर पशुओं को न लेकर जाए।
7. गोशालाओं में फॉगिंग कराएं।
कोट
लंपी स्किन बीमारी की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। धारा 144 लगाई गई है। लंपी स्किन बीमारी की रोकथाम को लेकर पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग पूरी तरह से सतर्क है। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक के नेतृत्व में विभाग के 53 पशु चिकित्सालयों व 91 पशु औषधालयों में संभावित लक्षण वाले पशुओं का इलाज कर रही है। इस बीमारी में मृत्यु दर केवल एक-दो प्रतिशत है। इसलिए पशुपालक व गोशाला प्रबंधक को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह बीमारी पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलती है। विभाग के अनुसार दूध को उबालकर उपयोग किया जा सकता है।
-प्रदीप कुमार, उपायुक्त फतेहाबाद।