बिना किसी ठोस वजह के उपभोक्ता का बीमा रद्द नहीं किया जा सकता है। उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन राजबीर सिंह ने यह टिप्पणी करते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को बीमा धारक को 23 लाख रुपये छह फीसदी ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। साथ ही उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर 11 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है।
इस मामले में गांव भोड़ियाखेड़ा निवासी कृष्ण कुमार ने उपभोक्ता आयोग में चार जनवरी 2021 को याचिका दायर की थी। याचिका में कृष्ण कुमार ने बताया था कि उसने ट्राला खरीदा था। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से 6 दिसंबर 2018 को उसने ट्राले का बीमा करवाया। यह बीमा पांच दिसंबर 2019 तक था।
उस समय कंपनी ने उसके ट्राले की कीमत 23 लाख रुपये आंकी थी। कृष्ण ने बताया कि सितंबर 2019 की रात को उसका ट्राॅला चोरी हो गया। उसने अगले ही दिन इसकी शिकायत पुलिस को कर दी थी। फतेहाबाद शहर थाना पुलिस ने जांच के बाद 12 अक्तूबर 2019 को ट्राॅला चोरी का केस दर्ज किया था। इसके बाद 15 दिसंबर 2020 को पुलिस ने अदालत में इस मामले को अनट्रेस दिखा दिया। उसने बीमा कंपनी से क्लेम की मांग की थी।
कंपनी ने चोरी का मामला देरी से होने पर नहीं दिया बीमा क्लेम
कृष्ण कुमार ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया कि क्लेम दाखिल करने के बाद भी बीमा कंपनी का कोई सर्वेयर नहीं पहुंचा और न ही इसकी जांच की गई। कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम देने से मना कर दिया कि चोरी के बाद केस दर्ज होने में देरी हुई है। इसलिए क्लेम नहीं दिया जा सकता।
आयोग ने 23 लाख रुपये देने के दिए आदेश
इस मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन राजबीर सिंह व सदस्यों ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनी ने बिना किसी ठोस वजह से बीमा क्लेम देने से इन्कार किया है, जबकि पुलिस ने केस भी दर्ज किया और जांच रिपोर्ट भी दी है। कंपनी की ओर से कोई सर्वेयर भी नहीं पहुंचा। इसलिए बीमा कंपनी जब से आयोग में केस दायर हुआ है, तब से अब तक छह फीसदी ब्याज सहित कृष्ण कुमार को 23 लाख रुपये का हर्जाना दें। अगर 45 दिनों में हर्जाना नहीं दिया गया तो नौ फीसदी ब्याज सहित हर्जाना देना होगा। साथ ही कंपनी को 11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।