फतेहाबाद। हिसार से अलग होकर 15 जुलाई 1997 को फतेहाबाद जिला बन गया, लेकिन अपने पिछड़ेपन को अभी तक नहीं सुधार सका है। कभी कॉटन इंडस्ट्री के नाम से मशहूर रहा फतेहाबाद अब बड़ी औद्योगिक प्लांट के लिए तरस रहा है। औद्योगिक क्षेत्र की बदहाली से उद्योगपति पलायन को मजबूर हो रहे हैं। उद्योगपतियों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण उद्योगों को सुविधाएं न मिलना है। जिला मुख्यालय के औद्योगिक क्षेत्र में ही सफाई तक नहीं है। ट्रकों की आवाजाही के लिए खुली सड़क तक नहीं है। छोटी-छोटी गलियां हैं, जिनमें सफाई के लिए नगर परिषद के कर्मचारी कभी नहीं आते हैं और गलियों में स्ट्रीट लाइट तक नहीं है।
एक समय था, जब जिले में कॉटन इंडस्ट्री के अलावा सरसों व सूरजमुखी के तेल की मिलें थीं, लेकिन अब यह सुनसान पड़ी हैं। जिले में राइस शेलरों की संख्या तो अच्छी खासी है, लेकिन इसके अलावा कोई बड़ा उद्योग आज तक नहीं पनपा है। औद्योगिक क्षेत्र में 50 से अधिक उद्योग एवं कोल्ड स्टोर बने हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा फुटवियर फैक्टरियां हैं। मगर यहां स्ट्रीट लाइट तक की सुविधा नहीं है। शाम ढलते ही गलियों में अंधेरा छा जाता है। उद्योगों के लिए निर्बाध बिजली चाहिए, लेकिन बिजली कटों से बार-बार कामकाज प्रभावित होता है। स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी है, उनको ठीक करने की भी नगर परिषद प्रशासन जहमत नहीं उठा रहा है। जिला मुख्यालय होने के बावजूद फतेहाबाद शहर में बड़ा उद्योग नहीं स्थापित हो पा रहा है। छोटे-छोटे कारोबार हैं, लेकिन बड़ा उद्योग या कोई प्लांट न लगने के कारण युवाओं को भी पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि औद्योगिक नगर में कोई सुविधा ही नहीं मिलेगी तो कोई उद्योग क्यों लगाएगा। समस्याओं के बारे में जानकारी होने के बाद भी प्रशासन का कोई सहयोग नहीं मिल सका है। संवाद
उद्योगपति बोले- बार-बार लगते है बिजली के कट
मेरी 23 वर्षों से फतेहाबाद के औद्योगिक क्षेत्र में बिस्कुट की फैक्टरी है। यहां पर लगा बिजली का ट्रांसफार्मर गली के बिल्कुल बीच में हैं, जिसको हटाने की मांग 23 साल से कर रहे हैं। बिजली निगम ट्रांसफार्मर हटाने के लिए एक लाख रुपये का खर्च मांग रहा है। फतेहाबाद में उद्योग लगाना मूर्खता का काम बन गया है। बिजली के कट बार-बार लगते हैं। सीवर के ढक्कन टूट पड़े हैं। बिजली के तार बिल्कुल नीचे लटक रहे हैं। कभी भी हादसा हो सकता है। अपनी फैक्टरी के सामने खुद अपने कर्मचारियों से सफाई करवानी पड़ती है। प्रशासन का उद्योगों की तरफ कोई ध्यान नहीं है।
-विकास कुमार, उद्योगपति
औद्योगिक नगर में 27 वर्षों से चाय की दुकान चला रहा हूं। मेरे देखने में औद्योगिक नगर में कोई विकास नहीं हुआ है। दुकान के सामने गली के बीच में गड्ढा बना हुआ, जिससे हर रोज हादसे हो रहे हैं। पार्षद को कई बार शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। चोरी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। सफाई नहीं होने से परेशान उद्योगपतियों को खुद अपने कर्मियों से सफाई करवानी पड़ती है। बारिश के दिनों में कई-कई दिनों तक जलभराव रहता है।
-संजय, दुकानदार, औद्योगिक नगर
फतेहाबाद के औद्योगिक नगर में पिछले 20 वर्षों से जूता फैक्टरी में सुपरवाइजर हूं। सफाई करवाने के लिए पार्षद को कई-कई बार कहने के बाद महीने में एक या दो बार ही सफाई होती है। गलियों में लगी सभी स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। इस कारण फतेहाबाद का औद्योगिक क्षेत्र नशेड़ियाें का अड्डा बन चुका है। चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
-नीरज कुमार, सुपरवाइजर, जूता फैक्टरी
कोट
इंडस्ट्रियल एरिया की समस्याओं के बारे में मीडिया के जरिये जानकारी मिली है। निश्चित रूप से मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। जल्द ही बदलाव नजर आएगा।
-संजय बिश्नोई, जिला नगर आयुक्त, फतेहाबाद