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कनाडा की अंधाधुंध दौड़ के बजाय अमेरिका का रुख करें भारतीय विद्यार्थी : बृजभूषण

Sun, 10 Dec 2023 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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पत्रकारों से बातचीत करते एनआरआई बृजभूषण मिड्ढा। 
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फतेहाबाद। अमेरिका निवासी एनआरआई बृजभूषण मिड्ढा ने कहा कि भारतीयों का अमेरिका में लगातार प्रभाव बढ़ रहा है। अधिकांश बड़ी कंपनियों के प्रमुख पदों पर भारतवंशी लोग अपनी काबिलियत के बल पर विराजमान हैं। अमेरिका में कॉलेज स्तर की पढ़ाई शानदार है। इसलिए कनाडा की अंधाधुंध दौड़ के बजाय अमेरिका की ओर विद्यार्थियों को रुख करना चाहिए। वहां हर क्षेत्र में भारतीयों के लिए स्कोप है।
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मिड्ढा शनिवार को फतेहाबाद प्रेस क्लब के चाय पर चर्चा कार्यक्रम में मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे। डाक विभाग की ओर से बृजभूषण मिड्ढा के नाम पर पांच रुपये की डाक टिकट भी जारी की गई है।
मिड्ढा ने बताया कि वर्ष 2001 में वे फतेहाबाद से अमेरिका गए थे। वहां जाकर कड़ा परिश्रम किया। धीरे-धीरे खुद का कारोबार शुरू करके उसे आगे बढ़ाया। इसके बाद समाजसेवा के कार्यों से भी जुड़े रहे। 2003 में उन्होंने अमेरिका में रहने वाले हरियाणा के लोगों के साथ मिलकर हरियाणा अमेरिकन एसोसिएशन भी बनाई, जो वहां रहने वाले भारतीयों की हर संभव मदद करती है।
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अमेरिका में खेती में बढ़ रहा भारतीयों का रुझान
मिड्ढा ने बताया कि अमेरिका में भारतीयों का बिजनेस के बाद अब फार्मिंग और होटल इंडस्ट्री में रुझान बढ़ा है। वहां पर भारतवंशी लोग जमीनें खरीदकर खेती कर रहे हैं। ज्यादातर लोग बागवानी कर रहे हैं। इसके अलावा कई भारतीयों ने वहां होटल भी बनाए हैं। अमेरिका और भारत के टैक्स सिस्टम पर उन्होंने बताया कि दोनों में काफी अंतर है। वहां छोटी से छोटी चीज और बड़ी से बड़ी चीज पर एक सामान टैक्स लिया जाता है। हर राज्य का टैक्स प्रेसेंटेज अलग है। लोग भी टैक्स भरने में दिलचस्पी लेते हैं। इससे सरकार को बड़ा राजस्व मिलता है। वहीं, भारत में हर सामान पर अलग-अलग टैक्स हैं, काफी चीजों पर टैक्स ज्यादा हैं, जिस कारण लोग टैक्स न भरने की जुगत में रहते हैं। सरकार को चाहिए कि टैक्स सिस्टम को दुरुस्त करें।

अमेरिका में चुनावों पर नहीं होता करोड़ों खर्च
मिड्ढा ने कहा कि भारत में हर साल कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं और इन चुनावों में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। वहीं, अमेरिका में नगरपालिका से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव एक साथ होता है। न ही वहां करोड़ों रुपये चुनाव पर खर्च किए जाते हैं। बेहद कम खर्च में चुनाव निपट जाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसी दिन भारतवंशी राष्ट्रपति भी बनेगा।
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