फतेहाबाद। शहर में बनाए गए तीन नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को खुद उपचार की जरूरत है। लोगों को स्वास्थ्य में होने वाली छोटी-छोटी दिक्कतों को लेकर भी जिला नागरिक अस्पताल में आना पड़ रहा है।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने शहर के स्वामी नगर, ठाकर बस्ती व नहर कॉलोनी में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर तो बना दिए। मगर अभी तक वहां कोई भी उपचार करने वाला चिकित्सक नियुक्त नहीं हुआ है। तीनों आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जीएनएम ही मरीजों का उपचार कर दवाएं दे रहे हैं। काफी समय बीतने के बाद भी तीनों आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कोई चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है।
लोगों के अनुसार रोजाना तीनों आरोग्य मंदिर में 100 से अधिक नागरिक दवाई लेने आते हैं। चिकित्सक नहीं होने के कारण आयुष्मान आरोग्य मंदिर में आने वाले मरीजों को दवाई देने में भी काफी दिक्कत होती है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर में उपस्थित कर्मचारी पहले मरीज के स्वास्थ्य काे लेकर जानकारी लेते हैं, फिर फोन पर ही चिकित्सक को मरीज के स्वास्थ्य के बारे में ही बताते हैं, चिकित्सक फोन पर ही कर्मचारी को उपचार के बारे में जानकारी देता है। इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण मरीजों को नागरिक अस्पताल में ही जाना पड़ रहा है।
दो में चिकित्सक नहीं, एक पर लगा मिला ताला
शहर के ठाकर बस्ती व नहर कॉलोनी में बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कोई भी चिकित्सक नहीं था, वहीं स्वामी नगर में बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर ताला लटका हुआ था। स्वामी नगर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी को फोन किया तो उनका नंबर बंद आ रहा था। साथ ही ठाकर बस्ती व नहर कॉलोनी के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में एक हेल्पर के साथ एक जीएनएम मौजूद थी, जो सेंटर पर आए मरीजों को दवाई दे रहे थे।
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दवाई की मात्रा है पूरी
आयुष्मान आरोग्य मंदिर में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि सेंटर पर दवाई तो पूरी आती है, वहीं गर्भवती महिलाओं की जांच भी की जाती है। सेंटरों पर हर प्रकार का टीकाकरण भी किया जाता है। टीकाकरण करने के लिए दिन निर्धारित किए गए हैं। उसी अनुसार बच्चों का टीकाकरण किया जाता है। टीकाकरण करने के लिए प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर में दो एएनएम की भी ड्यूटी लगा रखी है।
विभाग अनुसार आरोग्य मंदिर में यह मिलती है सुविधा
यहां सामान्य टेस्ट के साथ डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों की शुरुआती जांच की सुविधा है। साथ ही ओपीडी एवं टेली मेडिसिन द्वारा चिकित्सक से परामर्श के अलावा गर्भावस्था एवं शिशु जन्म देखभाल, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, बाल स्वास्थ्य एवं किशोरावस्था स्वास्थ्य देखभाल, परिवार नियोजन, गर्भ निरोधक सेवाएं एवं अन्य प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल, संचारी रोगों का प्रबंधन, गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग आदि सेवाएं दी जाती हैं। इन केंद्रों पर पर्याप्त दवाएं, स्वास्थ्यकर्मी, जांच की व्यवस्था और बुनियादी स्वास्थ्य संरचना का इंतजाम किया गया है। बाकायदा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
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:: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होना चाहिए। सरकार अस्पताल तो बना रही है, लेकिन वहां पर चिकित्सक नहीं है। यह अस्पताल एक दवाखाना बनकर रह गए हैं। जहां पर कोई भी मरीज आए और दवाई लेकर चला जाए।
कपिल खत्री, पार्षद, वार्ड नंबर 26
सरकार दावा करती है कि अस्पतालों में बेहतरीन सुविधाएं है तो जब कोई विधायक या मंत्री को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होती है तो निजी अस्पतालों में क्यों जाते है। अस्पतालों में हालात सिर्फ कागजों में अच्छे है। रोजाना सैकड़ों मरीज चिकित्सक न होने के कारण बिना दवाई लिए घर जा रहे है।
- नितिन, शहरवासी
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सरकार हर साल करोड़ों रुपये स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करती है, लेकिन हालात नहीं सुधर रहे। नागरिक अस्पतालों में मिलनी वाली सुविधाएं निजी अस्पताल जैसी होनी चाहिए।
करण कुमार, शहरवासी