हिंदी को मातृभाषा का दर्जा मिले अरसा बीत चुका है, लेकिन अभी भी उत्तर भारत के कुछ हिंदीभाषी राज्यों को छोड़कर बाकी जगह पर हिंदी को वो सम्मान नहीं मिलता, जिसकी वो हकदार है। इस बात की टीस सभी के मन में होती है।
अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयास हिंदी हैं हम के तहत शुक्रवार को जब हिंदी अध्यापिकाओं से बात की गई तो ये टीस उनकी बातों में भी निकल कर सामने आई। उन्होंने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि कम से कम किसी संस्थान ने हिंदी को इतनी गंभीरता से जनजन तक पहुंचाने का बीड़ा तो उठाया है।
आज के समय में स्कूलों व कॉलेजों में मातृभाषा के स्थान पर अन्य दूसरी भाषाओं अधिक महत्व दिया जाने लगा है। जिस कारण विद्यार्थी अपनी हिंदी विषय में भी फेल होने लगे है परंतु अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान मातृभाषा को ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने में कारगार साबित होगा।
- शिवानी अरोड़ा, हिंदी अध्यापिका, द ऑलिव पब्लिक स्कूल, फतेहाबाद
इस युग में नई युवा पीढ़ी अपनी मातृभाषा हिंदी से दूर होता जा रही है। जिससे कि अभिभावकों व अध्यापकों को हिंदी भाषा की महत्ता को समझते हुए इस ओर ध्यान देना जरूरी है और अपने बच्चों को मातृभाषा हिंदी के प्रति प्रेरित करना चाहिए। अमर उजाला का यह अभियान युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने के लिए सराहनीय कदम है।
- डॉ. हरपाल ग्रोवर, हिंदी प्रवक्ता, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फतेहाबाद