फतेहाबाद। हेपेटाइटिस सी और बी की जांच को लेकर शुरू की गई सैंपलिंग को एक बार फिर से बंद कर दिया गया है। आरटीपीसीआर लैब में जांच के लिए किट खत्म हो गई है और विभाग के पास खरीदने के लिए बजट भी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने 21 दिन पहले ही हेपेटाइटिस सी की सैंपलिंग शुरू की थी लेकिन 500 मरीजों की जांच के बाद सैंपल जांच किट खत्म हो गई है। हेपेटाइटिस बी की सैंपलिंग ट्रायल के बाद शुरू हीं नहीं हो पाई है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच किट को लेकर मुख्यालय के पास डिमांड भेजी गई है। पिछले पांच माह से जिले में हेपेटाइटिस सी और बी की जांच को लेकर मरीज भटक रहे हैं। पिछले दिनों ही किट आने के बाद सैंपलिंग की उम्मीद जगी थी लेकिन एक बार फिर बंद होने झटका लगा है।
निजी लैब से खत्म कर दिया था अनुबंध
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी का उपचार शुरू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए निजी लैब से अनुबंध किया था। मरीज को डॉक्टर कार्ड जारी करते और उसे दिखाकर निजी लैब से जांच करवाई जाती थी और उसके बाद जिला अस्पताल में ही मरीज को दवाई उपलब्ध करवाई जाने लगी। लेकिन पिछले साल 28 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग ने निजी लैब से अनुबंध खत्म कर दिया और आरटीपीसीआर लैब में जांच शुरू करने के निर्देश दिए। पहले लैब में माइक्रोबायलोजिस्ट न होने और फिर किट न होने के चलते जांच शुरू नहीं हो पाई थी।
हेपेटाइटिस सी को लेकर रेड जोन में शामिल है जिला
डाक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस सी वायरस के लक्षण पांच से लेकर सात सालों के बाद नजर आते हैं। रतिया क्षेत्र में सर्वे के दौरान सामने आया था कि आरएमपी डाक्टरों ने इलाके में कई लोगों को एक ही सीरिंज से टीके लगाए जिससे हेपेटाइटिस सी वायरस (एससीवी) एक से दूसरे में चला गया। रतिया व उसके आसपास के क्षेत्र में करीब 11 साल पहले काला-पीलिया के आशंकित मरीज सामने आने लगे थे। रतिया में सर्वे के दौरान करीब 15 सौ मरीज सामने आए और बढ़ते चले गए। रतिया, हमजापुर, बुर्ज, बीराबदी, टोहाना, कुलां, अकांवाली, झलनियां, एमपी सोतर, टिब्बी, अयाल्की, नहेड़ी, समैन, चिम्मो, इंदाछुई, बिलासपुर, हिजरावां खुर्द, अहरवां, घासवां, नागपुर, बहबलपुर, नथवान, रत्ताखेड़ा, भिरड़ाना, धीड़, हसंगा, जमालपुर, जल्लोपुर, कमाना समेत जिले के कई गांवों में हेपेटाइटिस सी के मरीज पाए गए।
तीन से छह माह खानी होती है दवा
डॉक्टरों के मुताबिक हेपेटाइटिस सी के मरीजों को तीन माह दवा खानी होती है। जिन मरीजों का लीवर खराब हो जाता है, उन मरीजों का 6 महीने दवाई दी जाती है। जिन मरीजों का उपचार पूरा हो गया है, उन्हें हेपेटाइटिस-सी का कार्ड टेस्ट दोबारा करवाने की जरूरत नहीं है, कार्ड टेस्ट 15 साल तक पॉजिटिव रह सकता है।
ये हेपेटाइटिस सी मरीजों की स्थिति
जिला अस्पताल में शुरू हुआ उपचार : वर्ष 2017
पंजीकृत मरीज : 6310
जांच के दौरान हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई मरीजों में : 4850
कोट
हेपेटाइटिस सी की जांच फिलहाल रोक दी गई दी गई है। लैब में किट न होने के चलते जांच रोकी गई है। जो भी मरीज आ रहे है उनकी सूची बनाई जा रही है। किट आने के बाद जांच शुरू कर दी जाएगी।
-डॉ. मनीष टुटेजा, विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल फतेहाबाद।