फतेहाबाद/भट्टू कलां। खेतों से कटाई के बाद जिले की अनाज मंडी में सरसों की फसल पहुंचने लगी है। बुधवार से सरकारी खरीद भी कागजों में शुरू हो गई है, लेकिन धरातल पर इसका लाभ किसानों को नहीं मिला। फतेहाबाद व भट्टू अनाज मंडी में पहले दिन सरकारी खरीद नहीं हुई। हैफेड ने सरसों की फसल में नमी ज्यादा बताते हुए सरसों की खरीद नहीं की। मजबूरन किसानों को 800 रुपये से लेकर एक हजार रुपये प्रति क्विंटल तक नुकसान के साथ प्राइवेट खरीदारों को सरसों बेचनी पड़ी। मार्केट कमेटी सचिव विकास सेतिया के अनुसार फतेहाबाद मंडी में पहले दिन 169 क्विंटल सरसों की प्राइवेट खरीद हुई।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार द्वारा सरसों का एमएसपी रेट 5450 निर्धारित किया गया है। मगर प्राइवेट खरीदार किसान से 4300 रुपये से लेकर 4600 रुपये तक में फसल खरीद रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस महंगाई के दौर में सरसों का एमएसपी छह हजार रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। सरसों की कुछ फसल अधिक ठंड के कारण खराब हो चुकी है।
मंगलवार को लाए फसल, दो दिन में भी नहीं हुई खरीद
गांव भूथन कलां से फसल लेकर आए किसान हवा सिंह ने बताया कि मैंने मंगलवार सुबह सरसों निकलवाई थी। निकलवाते ही सीधे फतेहाबाद की अनाज मंडी में लेकर आया था। मगर सरसों का भाव व्यापारियों ने 4200 रुपये लगाया है। जब मैंने कम रेट की बात कही तो व्यापारियों ने कहा कि सरसों गीली है। इसलिए कम मूल्य लगा है। मैंने अपनी सरसों मंडी में ही सुखाने के लिए बिछा दी है। अब बुधवार से सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है और मैंने अपनी फसल का पंजीकरण करवा दिया है। अब मैं अपनी फसल को सरकारी मूल्य पर ही बेचूंगा।
पंजीकरण करवाने वाले किसान लेकर आए फसल
भट्टू कलां। पहले दिन भट्टू मंडी में भी किसी एजेंसी ने सरकारी खरीद नहीं की। तीन किसान सरसों बेचने के लिए आए थे जिन्होंने फसल का पंजीकरण करवाया हुआ है। जिन किसानों ने पंजीकरण नहीं करवाया था, उनकी सरसों की खरीद व्यापारी एमएसपी से कम दाम में करते रहे। बुधवार को आई सरसों की तीन ढेरियों में नमी अधिक होने व तेल की मात्रा कम होने की बात कही गई। सरसों की खरीद के लिए मार्केटिंग सोसायटी व हैफेड की जिम्मेदारी लगी है। बुधवार को हैफेड को सरकारी खरीद करनी थी। किसान रमेश, नरेंद्र की करीब 30- 35 क्विंटल सरसों में नमी की मात्रा आठ फीसदी से अधिक बताई गई। वहीं, तेल की मात्रा 32 प्रतिशत ही थी। सरसों में नमी की मात्रा 8 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए जबकि तेल की मात्रा 38 प्रतिशत से ऊपर होनी चाहिए।
मार्केट कमेटी सचिव अमनजीत ने बताया कि पहले दिन सरसों की पंजीकृत फसल की तीन ढेरियां आई थी। मगर नमी अधिक होने व तेल की मात्रा कम होने पर हैफेड ने नहीं खरीदी। किसानों को फसल सुखाने के लिए कहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरसों को 4-5 दिन सुखाकर ही मंडी में लेकर आएं।
फसल का पंजीकरण नहीं करवाया हुआ है। मेरी फसल को व्यापारी 4700 के आसपास रेट पर खरीद रहे हैं। मैं इससे ऊपर दाम पर फसल बेचना चाहता है।
रमेश कुमार, किसान, भट्टू कलां
: मैं करीब 12 क्विंटल सरसों लेकर मंडी में बेचने आया था। मगर फसल का पंजीकरण नहीं करवाया है। व्यापारियों ने 4550 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद की है।
सुरेश कुमार, किसान, गांव मेहूवाला
हमारी करीब 10 क्विंटल सरसों को 4900 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से व्यापारियों ने खरीदा है। फसल का पंजीकरण नहीं करवाया था। सरकारी खरीद तो हुई नहीं।
मदनलाल, किसान, गांव सूलीखेड़ा