फतेहाबाद। स्वतंत्रता सेनानी व शहीद के गांव ढिंगसरा में ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव में चार दिन में एक बार पानी आ रहा है। इसके अलावा गांव में बढ़ी नशे की प्रवृति के कारण आए दिन चोरियां व छीनाझपटी होती है। गांव में महिलाएं तो घर से निकलने से भी डर रही हैं। गांव की बड़ी दो इन समस्याओं पर प्रशासन भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
गांव ढिंगसरा को वर्ष 1514 में जोशी ब्राह्मण, जाखड़ व गोदारा परिवारों ने बसाया था। इस गांव को जोहड़ व तालाब के पास बसाया गया था, इसलिए इसका नाम ढिंगसरा पड़ा। इस गांव की आबादी फिलहाल छह हजार से अधिक है और चार हजार के करीब मतदाता हैं। गांव में बड़ी समस्या की बात की जाए तो पेयजल की आपूर्ति इस गांव की बड़ी समस्या है। गांव में जो वाटर वर्क्स है, उसकी क्षमता इतनी नहीं कि उसमें पूरे महीने के पानी का स्टोरेज हो सके। वाटर वर्क्स में तीन टैंक हैं, लेकिन आबादी के अनुसार, इन टैंकों में पानी स्टोरेज की क्षमता काफी कम है।
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चिट्टे की प्रवृत्ति बढ़ने से हो रही आपराधिक घटनाएं
गांव ढिंगसरा में वैसे तो बाबा मनसागर धाम सहित कई मंदिर हैं। यहां पर बाबा मनसागर धाम में हर साल होली व दिवाली पर मेला लगता है, लेकिन इसके बावजूद गांव में चिट्टे के नशे की प्रवृत्ति काफी बढ़ी हुई है। गांव के लोगों का कहना है कि इन सालों में गांव में चिट्टे का नशा काफी बढ़ गया है। गांव में प्रतिदिन चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। यही नहीं गांव के पशु अस्पताल का 10 टन का गेट भी उखाड़कर चोर ले गए। गांव के कुछ रास्तों पर तो छीनाझपटी की घटनाएं होती रहती हैं। अब तो महिलाएं भी गांव की सड़क पर जाने से भी डरती हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव के वाटर वर्क्स में जो पौधे लगे हुए हैं, उनकी फलियां खाने से बकरियों की मौत हो रही है। अब तक 50 के करीब बकरियों की जान जा चुकी है।
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शहीद व स्वतंत्रता सेनानियों का गांव
गांव ढिंगसरा के निवासी रणजीत सिंह 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध में शहीद हो चुके हैं। इसके अलावा गांव के पंडित लेखराम व खेमाराम आजाद हिंद फौज में रहे हैं। गांव का इतिहास अगर बताया जाए तो इस गांव के युवा राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में मेडल भी ले चुके हैं, लेकिन अब गांव नशे की प्रवृत्ति के कारण बदनाम भी हो रहा है, जिसको लेकर गांव के बुजुर्गों को दुख भी है।
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गांव में सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। चार दिन बाद पानी आता है, जिस कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पानी की पाइप लाइन काफी पुरानी है और जगह-जगह लीकेज होती रहती है, जिस कारण लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाता।
-रोहताश, ग्रामीण
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नशे ने गांव के युवाओं को गर्त में फैला दिया है। गांव में चिट्टे के नशे की अधिक प्रवृत्ति बढ़ गई है। हालात यह हैं कि लोगों से छीनाझपटी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। महिलाएं गांव के कुछ रास्तों पर जाने से डरती हैं, इसलिए गांव में सुरक्षा के प्रबंध होने चाहिए।
-उमेद सिंह, ग्रामीण
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गांव में वैसे तो कोई समस्या नहीं, लेकिन गांव के वाटर वर्क्स में जो पेड़ लगे हैं, उनकी फलियां खाने से गांव की बकरियों की मौत हो रही है। फलियां खाने के बाद बकरियों को प्यास लगती है और पानी पीते ही उनकी मौत हो जाती है। इन पेड़ों की कटाई होनी जरूरी है।
-गुलाब सिंह, सेवानिवृत्त कर्मचारी
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पीने के पानी को लेकर बड़ी समस्या आती है। एक गली में पानी आता है तो दूसरी में नहीं। चार दिन बीतने के बाद पानी अता है, जिस कारण हमको टैंकरों से पानी लाना पड़ता है। नहर बंदी में तो हालात और भी नाजुक हो जाते हैं।
-आत्माराम, ग्रामीण
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गांव में नशे की लत के हालात यह हैं कि गांव में स्कूल से लेकर आंगनबाड़ी तक में चोरियां हो रही हैं। कई बार पुलिस को इसकी सूचना दी गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। नशे की लत को दूर करने के लिए प्रशासन को कदम उठाना चाहिए।
-सवाई सिंह, ग्रामीण
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गांव में पीने के पानी की बड़ी समस्या है। इसके लिए पब्लिक हेल्थ के कार्यकारी अभियंता को शिकायत भी दी गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कुछ लोगों ने अपने घरों में सब्जियां व चारे की बिजाई की हुई है और पीने का पानी इनकी सिंचाई के लिए प्रयोग कर रहे हैं। नशे को लेकर पुलिस व प्रशासन को भी सूचित किया गया है और उनके नाम भी दिए गए हैं। लेकिन कोई भी व्यक्ति नशा छुड़वाने के लिए सामने नहीं आता। वाटर वर्क्स से पेड़ कटवाने की डिमांड भी भेजी गई है।
सुभाष मूंड, सरपंच, ढिंगसरा
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मैंने अभी ही ज्वाइन किया है। गांव ढिंगसरा में अगर पीने के पानी की समस्या है तो इसको दूर किया जाएगा। इसे नोट कर लिया है। गांव में वाटर वर्क्स में जो दिक्कत है, उसको दूर किया जाएगा।
-एसके त्यागी, कार्यकारी अभियंता, पब्लिक हेल्थ फतेहाबाद