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71 वर्षों में पहली बार गांव नाढ़ोड़ी में अनुसूचित जाति वर्ग के हाथों में होगी सरपंची

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भूना (फतेहाबाद)। पंचायती चुनाव की घोषणा के साथ ही आरक्षण व्यवस्था लागू होने से गांव नाढोड़ी में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। इसके साथ ही सरपंची और जिला परिषद के लिए अलग-अलग चुनावी रणनीति बननी शुरू हो गई है। देश की आजादी के बाद संयुक्त पंजाब में सन् 1951 से गांव की सरपंची बिश्नोई समाज के हाथों में रही है, लेकिन इस बार गांव में सरपंच का पद अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। गांव की चौधर के लिए पहले दो गुट आमने-सामने होते थे। समीकरण बदलते ही दोनों गुट अब जिला परिषद चुनाव में जोर आजमाइश करेंगे।
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बता दें कि गांव नाढोड़ी में कुल आबादी का 53 फीसदी हिस्सा बिश्नोई समाज से ताल्लुक रखता है। इस कारण 1951 से लेकर 2016 के बीच में एक बार ही दूसरे समाज का सरपंच बन पाया था, बाकी कार्यकाल में बिश्नोई समाज से ही सरपंच बना है। वर्ष 1992 से 1996 तक डिप्टी प्रसाद शर्मा सरपंच बने थे। वह ब्राह्मण समाज से थे। उसके बाद लगातार 67 वर्षों से बिश्नोई समाज के दो पक्षों के बीच चौधर रही है। गांव नाढोड़ी में साढ़े 9 हजार की आबादी में 5050 मतदाता हैं।
तब चुनाव का डंका बजते ही शुरू हो जाता था भंडारा
सरपंची के चुनाव में अभी पहले जैसी रंगत नजर नहीं आ रही है। पहले चुनावी डंका बजते ही नाढोड़ी में खाने-पीने के भंडार खोल दिए जाते थे। सरपंच पद के लिए उम्मीदवार अपने-अपने पक्ष में सरपंची को लेकर माहौल बनाते थे। इसलिए प्रतिदिन देसी घी की जलेबियां उतारी जाती थीं। गांव में प्रतिदिन 400 से ज्यादा लोगों का भोजन बनता था। बिश्नोई समाज के धारणिया गोत्र ने गांव की चौधर में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गांव नाढोड़ी में 1951 में बृजलाल धारणिया पहले सरपंच बने थे।
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गांव के बूथ संवेदनशील व अतिसंवेदनशील की श्रेणी में
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नाढोड़ी में बनाए गए बूथ प्रशासनिक रिकॉर्ड में संवेदनशील व अतिसंवेदनशील घोषित किए हुए हैं। यहां पिछले लंबे समय से दो पक्षों के बीच चौधर की लड़ाई को लेकर विवादास्पद माहौल बन जाता था।
अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों में होगी टक्कर
गांव नाढोड़ी में सरपंच पद के लिए इस बार कई दावेदार हैं। इनमें कड़ा मुकाबला होने की चर्चाएं हैं। इनमें से किसी एक को बिश्नोई समाज के मजबूत धड़े का समर्थन मिलेगा, उसके ही सिर पर चौधर का ताज सज पाएगा।
जीव रक्षक व पर्यावरण प्रहरी हैं ग्रामीण
बिश्नोई धर्म के संस्थापक गुरु जंभेश्वर के बताए नियमों के तहत गांव नाढोड़ी के लोगों में पर्यावरण एवं वन्य जीवों के प्रति अनूठा प्रेम है। यहां खेतों में जीव जंतुओं को फसलों में विचरण करने से रोका नहीं जाता। इसलिए नाढोड़ी क्षेत्र में काफी संख्या में वन्य जीव हैं। सैकड़ों की संख्या में काले एवं सामान्य हिरण, नीलगाय, खरगोश खुले घूमते हुए देखे जा सकते हैं। गांव के जोहड़, श्मशान भूमि, स्कूल, मंदिर तथा सार्वजनिक स्थलों पर हजारों की संख्या में पेड़ पौधे लगाकर हरा भरा वातावरण बना रखा है।
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