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बाढ़ का कहर : छूट गई पढ़ाई, बीमारियों से जूझ रहे बच्चें, मकानों में आईं दरारें

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फतेहाबाद नई अनाज मंडी में ​​बाढ़ पीड़ित शिक्षा से वंचित बच्चे।
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फतेहाबाद। फतेहाबाद से चार किलोमीटर दूर बसी ढाणी टाहली वाली के करीब 50 परिवार 11 दिन पहले आई बाढ़ की विभीषिका से त्रस्त हैं। यहां के लोग बाढ़ के पानी से निकलकर नई अनाज मंडी में बने राहत शिविर में शरण लेने के लिए पहुंचे। अब जब पानी हल्का कम होने लगा है, तो अपने घरों की हालात को देखकर लोग फूट-फूटकर रो रहे हैं। वहीं, राहत शिविर में बच्चे बीमार चल रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई छूट चुकी है और बीमारियों के प्रकोप से जूझ रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी की टीम लगातार बाढ़ ग्रस्त इलाकों में जा रही है। ढाणी टाहलीवाली में जाने का सीधा कोई रास्ता नहीं बचा है। यहां पर अभी भी तीन से चार फिट तक पानी जमा है। यहां पर अपने घरों को संभालने के लिए जाने वाले लोग केवल ट्रैक्टर के सहारे ही जा पा रहे हैं। हालात यह हैं कि पूरी की पूरी ढाणी के मकान बर्बाद हो चुके हैं। यहां पर बसने के लिए लोगों को लंबा समय लगेगा, ऐसे में राशन पानी की चिंता इनको सता रही है। यह ढाणी पूरी तरह से मजदूर वर्ग से जुड़ी है और यहां पर फिलहाल रहना इन लोगाें के लिए मुनासिब नहीं है, क्योंकि कभी भी मकान ढह सकते हैं। अपने मकानों की दुर्दशा को देखकर यह लोग आंसू बहा रहे हैं। राहत शिविर में शरण लिए हुए लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से उनको कोई मदद नहीं मिली है। केवल समाजसेवी संस्थाओं के सहारे वह जिंदा हैं। टीम ट्रैक्टर के माध्यम से ही यहां पहुंच पाई। पांच फिट पानी के बीच इस ढाणी के घर लगभग ढहने के कगार पर हैं। संवाद


बच्चों में हो गई आंखों की बीमारी

ढाणी टाहलीवाली में बाढ़ से ग्रस्त बेटियों जसनदीप, गगनदीप कौर, संजना, लक्षदीप ने बताया कि उनकी पढ़ाई तो छूट ही गई है और अब बीमारियों ने उनको घेर रखा है। इन बच्चों ने बताया कि आंखों की बीमारी राहत शिविर में रह रहे हर बच्चे को है। जो दवा मिलती है, उसका असर नहीं होता। किताबें भी उनके पास नहीं हैं, ताकि वह पढ़ाई जारी रख सकें।
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सरकारी दवाएं नहीं कर रही काम
नई अनाज मंडी में शरण लेकर बैठे ढाणी टाहलीवाली के इन परिवारों के बच्चों को बीमारियों ने अपनी चपेट में ले लिया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां पर मेडिकल कैंप लगाया गया है, लेकिन जो दवाएं उनको दी जा रही हैं, उसका असर ना होने की बात यह लोग कह रहे हैं। शिविर में रह रहे बच्चों को आई फ्लू की बीमारी हो चुकी है। शुक्रवार को जब हमारी टीम यहां पर मौजूद थी तो मोडाखेड़ा गांव से लोग आए और टीम ने बच्चों को अलग से आई फ्लू की दवा उपलब्ध करवाई।


घर हो गए तबाह, अब कहां जाएंगे
नम आंखों से इस शिविर में बैठी मिंद्र कौर, कश्मीरा बाई, लखविंद कौर व नवजोत सिंह ने बताया कि उनका सब कुछ तबाह हो गया है। घर बार सबकुछ छूट चुका है, 11 दिनों से यहां बैठे हैं, जब हम अपनी ढाणी को देखने जाते हैं तो बच्चों के भविष्य को देखकर चिंता हो रही है। सभी मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं और यह कभी भी ढह सकते हैं।

मजदूर तबका मांग रहा काम
दिल्ली वाली ढाणी के युवक प्रवीन ने बताया कि पिछले 11 दिनों से काम नहीं है, समाजसेवी संस्थाओं की रहनुमाई पर भोजन मिल रहा है। प्रशासन अगर कुछ काम दिलवा दे तो कुछ राहत मिल जाए।
राहत शिविरों में रिश्तेदार आ रहे मिलने
बाढ़ के कारण राहत शिविरों में रह रहे लोगों से मिलने के लिए उनके रिश्तेदार भी आ रहे हैं। मॉडल संस्कृति स्कूल व नई अनाज मंडी में शिविरों में शरण लिए हुए लोगों के रिश्तेदार उनकी खैर खबर लेने के लिए उनके पास आ रहे हैं।
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