ग्रामीण क्षेत्र में जहां एक तरफ धान सहित अन्य फसलों की कटाई का सीजन जोरों पर है, वहीं, दूसरी तरफ पंचायत चुनावों का शोर-शराबा है। फतेहाबाद के टोहाना से सुरेवाला की तरफ जाने वाले नेशनल हाईवे 148-बी पर हिसार जिले के सबसे बड़े गांव बिठमड़ा से सटा टोहाना खंड का सबसे छोटा गांव चितैन है। इस गांव की पंचायत के 35 साल के इतिहास में सिर्फ दो बार ही सरपंच पद के लिए चुनाव हुए हैं। बाकी समय ग्रामीण आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए सर्वसहमति से ही सरपंच चुनते रहे हैं।
गांव चितैन की आबादी महज एक हजार है। इनमें से 675 मतदाता हैं। गांव में छह वार्ड बने हुए हैं। गांव चितैन की खासियत यह है कि यह टिल्ले पर बसा गांव है। ग्रामीण राजेश धतरवाल व रामकुमार ने बताया कि 35 साल पहले 1987 में उनके गांव की पंचायत बनी थी।
यहां सभी जातियों के लोग आपसी भाईचारे से सर्वसहमति बनाकर सरपंच का चुनाव कर लेते हैं। यही कारण है कि यहां पंचायत चुनाव में सरपंच पद के लिए ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता है। न ही किसी तरह का विवाद पनपता है। सर्वसहमति बनने पर सरकार की तरफ से मिलने वाला पैसा भी विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है।
म्हारा गाम इस्या, जड़ै दो घंटे म्ह सरपंच बण ज्या
दोपहर करीब 12 बजे गांव में पहुंचने पर यहां पंचायत चुनावों का ज्यादा शोर-शराबा सुनाई नहीं देता है। जैसे ही गांव के बीच में बनी सांझी चौपाल के पास पहुंचते हैं तो यहां कुछ लोग बैठे दिखाई पड़ते हैं। सभी आपस में खेतीबाड़ी से लेकर पंचायत चुनाव को लेकर चर्चा में मशगूल है। इन ग्रामीणों में कुछ नौजवान भी शामिल हैं।
गांव में जब सरपंच के चुनावों की चर्चा शुरू होती तो ग्रामीण भी थोड़ी ही देर में अपना चुनावी रंग पकड़ जाते हैं। ग्रामीण लख्मीचंद कहते हैं कि भाई यू गाम बहुत ठंडा है। इस गाम म्ह तो बस दो दिन पहल्यां बेरा पाटैगा सरपंची में किसका नंबर आवेगा। इस बीच बात को आगे बढ़ाते हुए संजय धतरवाल कहते हैं कि यू गाम ईसा गाम सै सिर्फ दो घंटे में सरपंच बणा दे सै।
गांव में विकास कार्य जोरों पर
गांव चितैन बहुत ही छोटा गांव है। फिर भी इस गांव में धीरे-धीरे हर संभव सुविधा पहुंच रही है। निवर्तमान सरपंच फूल सिंह बताते हैं कि उन्होंने गांव की लगभग सभी गलियां पक्की करवाई है। गांव में जल घर से पीने का स्वच्छ पानी हर घर में पहुंच रहा है। चितैन ग्राम पंचायत के पास 40 एकड़ जमीन है, जिससे सालाना 16 लाख रुपये से अधिक की आमदनी होती है।
म्हारे गाम म्ह ज्यादातर सरपंच आपसी सहमति तै ही बणा दिया जावै। ठीक सै, चुनाव की घणी ड्रामेबाजी नहीं करणी पड़ती। किसै नै तंग भी नहीं होणा पड़दा।
-रामकुमार, ग्रामीण
35 साल तै गाम की पंचायत के चुनाव होंदे देखै हैं। पर इन 35 सालां म्ह सिर्फ दो बार ही सरपंची के चुनाव होये सै। बाकी बार तो सर्वसहमति ही बणाई गई सै।
-रामकुमार गुज्जर, ग्रामीण
हमारे गांव चितैन में विकास कार्य भी निरंतर जारी रहते हैं। पिछली पंचायत के कार्यकाल में भी खूब विकास कार्य हुए हैं। गांव बेशक छोटा है, लेकिन सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं।
-संजय धतरवाल, ग्रामीण
हमारे गांव के ग्रामीण ज्यादातर सरपंच पद पर सर्वसहमति बनाने में ही विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि सिर्फ दो बार ही चुनाव हुए हैं। हमारे लिए यह खुशी की बात भी है कि ग्रामीणों में भाईचारा है।
-रामनिवास, ग्रामीण
हमारे गांव में सरपंच पद के चुनाव में कोई ज्यादा पैसा खर्च नहीं होता है क्योंकि अधिकांश बार तो सर्वसहमति से ही सरपंच का चयन कर लिया जाता है।
-अंकुश, ग्रामीण