फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehabad News: घग्गर नदी के 10 किमी लंबे तटबंध को खुद ही ठीक करने में जुटे किसान

विज्ञापन
घग्गर नदी पर बांध बनाने के लिए जुटे किसान।
विज्ञापन
जाखल। घग्गर नदी से आई बाढ़ से बर्बादी झेलने के बाद प्रदेश सरकार से कोई बड़ी मदद न मिलने से आहत किसान अब अपने स्तर पर ही तटबंध मजबूत बनाने में जुट गए हैं। दस किलोमीटर लंबे बांध को मजबूत करने के साथ-साथ ऊंचा भी किया जाएगा। तटबंध मजबूत करने के लिए मिट्टी एकत्रित करने में 50 ट्रैक्टर और चार जेसीबी लगाई गई हैं। किसानों के अनुसार एक दिन का 80 हजार रुपये से अधिक खर्च आएगा। सभी मिल-जुलकर इस कार्य को पूरा करेंगे।गौरतलब है कि जाखल क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो गई थीं। किसानों की धान की फसल बर्बाद हो गई जबकि खेतों में रेत भर गए। वहीं, रेत को उठाने के लिए भी पंजाब के आसपास के क्षेत्र से काफी संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर मदद करने पहुंच रहे हैं। जाखल क्षेत्र के किसान कृष्ण कुमार, करमजीत सिंह, सुखा सिंह, हरदेव सिंह, सुखपाल शर्मा, गुरप्रीत सिंह, केवल सिंह, हरजोत सिंह व अन्य किसानों ने बताया कि खेतों में रेत भरने से फसलें बर्बाद हो गई हैं। आगामी फसल लगने की भी संभावनाएं नहीं है। रेत को निकालने और बांधों को मजबूत करने के लिए प्रशासन व प्रदेश सरकार से गुहार लगाई गई थी। मगर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। न ही इस दिशा में कोई कदम उठाए गए हैं। इस कारण किसानों को अपने स्तर पर ही बांध की मजबूती से लेकर रेत उठाने तक का काम करवाना पड़ा है।
विज्ञापन


किसान भाईचारा आया आगे
क्षेत्र के किसान लाभ सिंह, सागर सिंह, जंटा सिंह, बलवीर, कृष्ण, हरजोत सिंह, सोनू भादर, काका सिंह, दर्शन सिंह आदि ने बताया कि जाखल क्षेत्र में घग्गर नदी के साथ लगती जमीन वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है। घग्गर नदी के तटबंध अभी भी कई जगह से टूटे पड़े हैं। इसी के चलते सभी ने मिलकर जाखल रेलवे लाइन से लेकर कासिमपुर सड़क तक करीब 10 किलोमीटर तक नदी के तटबंध को ऊंचा व ठीक करने का बीड़ा उठाया है। इन सभी खेतों में जो रेत जमा हुई है, उसे उठाकर बांध के किनारों पर लगाया जाएगा। इस कार्य पर जो भी खर्चा होगा, वह सभी किसान मिल-जुलकर वहन करेंगे।


सरकार मदद कर देती तो नहीं आती दिक्कत
इन किसानों ने कहा कि सरकार द्वारा किसी भी प्रकार से नदी के तटबंधों को ठीक करने के लिए कदम नहीं उठाया गया है। इससे पहले ही बहुत भारी नुकसान हुआ था और अब भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अगर सरकार मदद कर देती तो किसानों को आर्थिक बचत हो जाती।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें