फतेहाबाद। गांव डूल्ट में बने पराली प्रबंधन प्लांट के क्षेत्र पर्यवेक्षक पर मुकदमा दर्ज करने के विरोध में प्लांंट में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों ने मंगलवार को लघु सचिवालय पहुंचकर एसपी आस्था माेदी से निष्पक्ष जांच कर मुकदमा रद्द करने की गुहार लगाई।
कंपनी में सिक्योरिटी मैनेजमेंट कर्मी राजेश कुमार ने बताया कि कंपनी पराली प्रबंधन का कार्य साल 2020 से कर रही है। कंपनी ने 28 मई को कैथल जिले के निवासी सुनील व गुरबक्श के साथ इकरारनामा किया था। कंपनी ने साल 2022 में 4080 टन पराली का प्रबंधन करके ढाणी मसीतांवाली में स्टॉक किया था। प्लांट देरी से चलने के कारण हमने स्टॉक माल सुनील कुमार व गुरबक्श को बेच दिया, जिसकी कीमत 23,60,000 रुपये तय हुई थी, जिसके एडवांस दो लाख रुपये दिए थे। उसके बाद सात लाख रुपये का भुगतान उन्होंने ऑनलाइन किया था। 15 सितंबर तक पराली उठाकर खेत खाली करना तय हुआ था। मगर ये लोग 90 प्रतिशत माल का उठान कर कंपनी की राशि दिए बिना ही ट्रैक्टर, बेलर, रैक व ट्रॉली लेकर भागने की फिराक में थे।
कंपनी के सुरक्षाकर्मी हरपाल सिंह ने 30 अगस्त को बताया कि ये दोनों लोग व तीन अन्य ड्राइवर रात को भाग कर जाने की फिराक में है। कंपनी के फ्यूल इंचार्ज व अन्य 3 कर्मचारियों को साथ लेकर पैसे के लेनदेन को लेकर बातचीत करने के लिए ढाणी मसीतांवाली में पराली स्टॉक वाली जगह गए तो सुनील व गुरबक्श ने कहा कि रात को अकेला ही सुरक्षाकर्मी होने के कारण हम अपने ट्रैक्टर और अन्य उपकरण पास की ढाणी में खड़े कर रहे हैं।
कंपनी का पूरा भुगतान करके ही उपकरण लेकर जाएंगे। फिर 3-4 दिन तक लेनदेन को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ तो पास की ढाणी मालिक ने जगह खाली करने को कहा। इसके बाद इन वाहनों व उपकरणों को भूना प्लांट में खड़ा कर दिया गया। इसके बाद सुनील व गुरबक्श भूना प्लांट में ट्रैक्टर व अन्य उपकरण लेने नहीं आए। जब दोनों से बकाया माल उठाने व पैसे के लेनदेन को लेकर कहा तो वो आनाकानी करने लगे। कर्मचारी राजेश कुमार ने आरोप लगाया कि सुनील व गुरबक्श को बाकी पैसे न देने पड़े, इसलिए 20 सितंबर को सुनील ने पराली प्रबंधन प्लांट के मैनेजमेंट प्रभारी मनप्रीत सिंह व 8-10 अन्य के खिलाफ झूठा केस दर्ज करवा दिया। उन्होंने केस की निष्पक्ष जांच करवाने और दोनों आरोपियों से बकाया 14 लाख रुपये की राशि दिलवाने की मांग की।
किसानों को हो सकती है दिक्कत
पराली प्रबंधन प्लांट के बंद होने से किसानों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्लांट के कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी है। जिस कारण सारा काम बंद हो चुका है। वहीं, खेतों में किसानों ने धान की फसल को काटना शुरू कर दिया है। पूरे जिले में एकमात्र यही बड़ा पराली प्रबंधन का प्लांट है। अगर प्लांट में कर्मचारियों की हड़ताल जल्द ही खत्म नहीं हुई तो किसानों द्वारा पराली जलाने के मामले बढ़ने की आशंका रहेगी।