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Fatehabad News: ई-टेंडरिंग पर जोर, पंचायती राज महकमा कमजोर

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फतेहाबाद में गांव मेहूवाला की बदहाल सड़क।
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फतेहाबाद। एक ओर सरकार ई-टेंडरिंग पर जोर दे रही है और सरपंच इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर फतेहाबाद जिले का पंचायती राज महकमा लगभग खाली पड़ा है। जिले में गांवों के हिसाब से हर गांव में तीन ग्राम सचिव चाहिए, लेकिन फतेहाबाद में ग्राम सचिवों के जो पद स्वीकृत हैं, वह भी पूरे नहीं है। कई खंडों में ग्राम सचिवों के पास पांच से 15 गांवों तक का कार्यभार है, वहीं कई सचिवों को मात्र एक-एक गांव ही दिया गया है।
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बता दें कि फतेहाबाद में खंड विकास पंचायत अधिकारियों के भी चार पद खाली पड़े हैं। जिले के सात खंडों में चार पद खाली पड़े हैं। पंचायती राज संस्थाओं के एसडीओ के पद भी तीन पद खाली हैं। जिले के 259 गांवों को अब केवल तीन बीडीपीओ और 62 ग्राम सचिव ही चला रहे हैं। सरकार इस समय ग्रामीण सरकार में ई-टेंडरिंग से काम करवाने पर पूरा जोर दे रही है। जिसका प्रदेश के अनेक सरपंच विरोध भी कर रहे हैं, लेकिन ई-टेंडरिंग या गांवों में होने वाले विकास की भूमिका निभाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों का पंचायती राज विभाग में टोटा पड़ा है। स्वयं पंचायत मंत्री के टोहाना क्षेत्र में ही ग्राम सचिवों की भारी कमी बनी हुई है। सरकार की ओर से फतेहाबाद में ग्राम सचिवों के 92 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इस समय जिले में सिर्फ 62 ग्राम सचिव ही कार्य कर रहे हैं। फतेहाबाद खंड को छोड़कर अन्य सभी छह खंडों में ग्राम सचिवों का भारी टोटा है। फतेहाबाद खंड में ग्राम सचिवों के 18 पद स्वीकृत हैं और सभी भरे हुए हैं, लेकिन अन्य खंडों में ऐसा नहीं है। वहीं छह ग्राम सचिवों को अभी तक कोई गांव अलॉट नहीं किया है और वह ऑफिस सीटिंग पर हैं। संवाद
15 गांवों का भार एक ग्राम सचिव पर
भूना खंड के अंतर्गत 29 गांव आते हैं, लेकिन यहां पर मात्र चार ग्राम सचिव ही कार्यरत हैं। यहां पर एक ग्राम सचिव को तो 15 गांवों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है। जाहिर है कि ऐसे में ई-टेंडरिंग या मनरेगा के काम इन गांवों में प्रभावित हो रहे हैं। एक ग्राम सचिव पर 15 गांवों का बोझ होना अपने आप में दर्शाता है कि ग्राम सचिवों की गांवों में कितनी आवश्यकता है। वहीं फतेहाबाद में दो ग्राम सचिवों को मात्र एक-एक गांव ही दिया गया है। इसी प्रकार भूट्टूकलां में सात, नागपुर में पांच, जाखल में छह, रतिया में 12 व टोहाना में 10 ग्राम सचिव ही काम कर रहे हैं।
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मनरेगा से लेकर अन्य कामों में हो रही परेशानी
गांवों में किसी भी विकास कार्य के टेंडर और मनरेगा के काम के लिए ग्राम सचिवों का होना अति आवश्यक है। ऐसे में ग्राम सचिवों के पास अलग-अलग गांवों का कार्यभार होने के कारण समय पर टेंडर नहीं हो पा रहे हैं। कई गांवों में तो मनरेगा का काम भी शुरू नहीं हो सका है। इसके अलावा विकास कार्यों की मॉनिटरिंग में भी दिक्कत है।
बीडीपीओ के चार पद खाली
फतेहाबाद में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों की भी कमी है। फतेहाबाद, भट्टूकलां, जाखल च भूना में बीडीपीओ के पद खाली पड़े हैं। नागपुर बीडीपीओ को फतेहाबाद व भट्टूकलां, रतिया बीडीपीओ को जाखल व टोहाना बीडीपीओ को भूना का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
किस खंड में क्या है ग्राम सचिवों की स्थित
खंड गांव स्वीकृत पद कार्यरत खाली
फतेहाबाद 48 18 18 00
रतिया 52 18 12 06
टोहाना 50 18 10 08
भट्टूकलां 24 09 07 02
भूना 29 10 04 06
जाखल 26 09 06 03
नागपुर 36 12 05 07
कोट
पंचायती राज में ग्राम सचिवों व अधिकारियों की कमी है। ग्राम सचिवों की डिमांड के लिए सरकार के पास समय-समय पर रिमाइंडर भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि ग्राम सचिवों व अधिकारियों की कमी पूरी हो जाएगी।
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-बलजीत चहल, डीडीपीओ, फतेहाबाद
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