कुलां। मौसम में हुए बदलाव से क्षेत्र में गेहूं की फसल में समय से पहले बालियां निकलनी शुरू हो गई हैं। इससे गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही पौधे छोटे होने की वजह से भूसे की भी किल्लत हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक आमतौर पर गेहूं की विभिन्न प्रजातियों की लंबाई 80 से 130 सेंटीमीटर तक होती है और ये प्रजातियां 90 से 145 दिनों में तैयार होती हैं।इस बार फसल की लंबाई करीब 30 सेंटीमीटर है और गेहूं में बालियां आनी शुरू हो गई हैं। अगेती किस्म के गेहूं में वैसे भी जनवरी के आखिरी सप्ताह से लेकर फरवरी के प्रथम सप्ताह तक बालियां आती हैं। लेकिन इन दिनों दिन का औसत तापमान 23 से 24 डिग्री है जबकि दिन का तापमान लगभग 20 डिग्री होना चाहिए। पौधों के छोटे होने के कारण बालियां भी बहुत छोटी लगी हैं। पौधे छोटे हैं तो इससे भूसा भी कम होगा। गेहूं बढ़ते समय नमी व मौसम का ठंडा होना जरूरी है। पकते समय शुष्क और गर्म मौसम होना जरूरी होता है। गर्म मौसम दानों के ठीक से पकने में मदद करता है। बढ़ते समय और बाली निकलने के दौरान जरूरत से ज्यादा उच्च तापमान या सूखे की स्थिति गेहूं के लिए हानिकारक होती हैं। संवाद
अपने भाग्य को कोस रहा अन्नदाता
क्षेत्र के गांव जापतेवाला निवासी किसान तरसेम ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में अगेती किस्म का बीज बोया है। उनके खेत में गेहूं में बालियां तो आ गईं, लेकिन पौधों में वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने अक्तूबर में गेहूं की बुवाई की थी। तरसेम सिंह ने बताया कि खेतों में गेहूं में असमय आई बालियों को लेकर उनकी परेशानी बढ़ी हुई है। हर बार फसल बर्बाद हो जाती है, कभी ज्यादा बारिश से तो कभी काफी सूखे से। इस बार कड़ाके की ठंड नहीं पड़ने से गेहूं को नुकसान हो रहा है।
कोट
ज्यादा तापमान और वातावरण शुष्क होने के कारण गेहूं में असमय बालियां आ जाती हैं, जबकि पौधे छोटे ही हैं। इस वजह से इस बार उत्पादन भी कम हो सकता है। अगेती फसल बुआई में ये दिक्कत आ रही हैं। जिन पौधों में बालियां निकल आई हैं, वो अब नहीं बढ़ेंगे। देरी से बुआई की गई गेहूं को मौसम से फायदा होगा।
-मुकेश महला, एसडीओ, कृषि विभाग टोहाना
न्यूनतम तापमान में गिरावट, ढिंगसरा के खेतों में जमा पाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद/भट्टू कलां। जिले में न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है। बुधवार को न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस कारण गांव ढिंगसरा में खेतों में पाला जम गया। सुबह कुछ खेतों में पाले की सफेद चादर बिछी नजर आई। पाले से फसलों को नुकसान की आशंका है। बुधवार को अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह 11 बजे तापमान 16 डिग्री रहा। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार भट्टू क्षेत्र में सरसों की फसल ज्यादा है, इसलिए यदि यह पाला आगे भी जमता है तो सरसों की फसल को खराब कर सकता है। पाला सब्जियों की फसल के लिए भी नुकसानदायक है, लेकिन भट्टू क्षेत्र में सब्जियों की फसलें भट्टू कलां, बनावाली, बनमंदोरी, ढाबी कलां व शेखुपुर दड़ौली में ज्यादा है।
कोट
पहाड़ों की तरफ से आ रही शीत हवाओं के कारण पाला जमना शुरू हो गया है। फसलों को पाले से बचाने के लिए उनमें सिंचाई जरूरी है। किसानों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
-डॉ. भीम सिंह, उपमंडल कृषि अधिकारी