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Fatehabad News: लापरवाही से गर्भ में शिशु का हृदय हो रहा कमजोर, 52 बच्चों के दिल में मिला छेद

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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल के डीईआईसी में ​शिशु को एक्सरसाइज करवाते हुए डॉक्टर।
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फतेहाबाद। गर्भावस्था में लापरवाही गर्भ में पल रहे शिशु पर भारी पड़ रही है। लापरवाही से शिशुओं का हृदय कमजोर हो रहा है। ये ही नहीं इसका असर शिशु के विकसित होते अंग पर भी हो रहा है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों में बच्चों की जांच के दौरान सामने आया है। पिछले साल जांच के दौरान 52 बच्चों के दिल में छेद मिला है। इसमें 28 बच्चों के दिल में छेद का ऑपरेशन करवाया जा चुका है।
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आरबीएसके के तहत जिला हस्तक्षेप आरंभिक केंद्र द्वारा इन बच्चों का जयपुर, फरीदाबाद और मोहाली के पैनल में शामिल अस्पताल में ऑपरेशन हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती बिना डॉक्टर के राय के दवाओं का सेवन कर लेती है। गर्भावस्था के दौरान ये दवाएं शिशु के दिल पर असर करती है। इसके अलावा गलत खानपान भी इसका कारण है। ये ही नहीं लापरवाही से शिशु के विकसित हो रहे अंगों पर भी असर पड़ रहा है। इस वजह से शिशु के पैर टेड़-मेढ़े होते हैं और कई अन्य जन्मजात रोग हो जाते हैं। संवाद
1 लाख 44 हजार बच्चों की हुई स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले साल अप्रैल माह से इस साल मार्च तक 1 लाख 44 हजार 562 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जांच के दौरान 18 बच्चे ऐसे मिले जिनके पैर टेढ़े-मेढे थे। इसके अलावा 22 बच्चों को होंठ कटे-फटे, 3 बच्चों के कमर में फोड़ा, 52 बच्चों के दिल में छेद और 451 बच्चों में जन्मजात रोग मिला। इसके अलावा 6644 बच्चों में एनीमिया, विटामिन ए,बी और डी की कमी मिली। स्क्रीनिंग में 4946 बच्चे ऐसे मिले जिनकी बुद्धि का विकास नहीं हुआ, कम दिखना और बोलने में दिक्कत होना के मिले। ये ही नहीं 18135 बच्चों में स्किन, डेंटल और कान का बहना आदि बीमारी मिली।
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57 बच्चों के करवाए गए ऑपरेशन
स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रीनिंग के दौरान मिले बच्चों के ऑपरेशन भी करवाएं हैं। विभाग ने कमर में फोड़ा के एक, पैर टेढ़े-मेढ़े के 8, कटे-फटे होंठ के 20 और दिल में छेद के 28 ऑपरेशन करवाए गए हैं। इन बच्चों के ऑपरेशन विभाग ने निशुल्क करवाए हैं। विभाग का करीब 25 से 30 लाख रुपये खर्च हुआ है।
कोट
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आठ टीमें है जो कि आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की जांच कर रही है। जांच के दौरान बीमारी से ग्रस्त बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल में रेफर किया जाता है। जिस बच्चे को ऑपरेशन की जरूरत होती है उसका निशुल्क ऑपरेशन नियम अनुसार करवाया जाता है।
-डॉ. कुलदीप गौरी, उप सिविल सर्जन
कोट
गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान सावधानियां बरतनी चाहिए। किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर से परामर्श लिए बिना न लें। इसके अलावा खानपान का भी ध्यान रखें। गर्भावस्था में लापरवाही के कारण ही शिशुओं का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है।
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-डॉ. हिमांशु ठकराल, इंचार्ज, जिला हस्तक्षेप आरंभिक केंद्र
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