फतेहाबाद। करीब पांच साल में जिले में नशे के कारण 38 युवकों की मौत हो गई। इन युवकों की मौत से कई परिवारों के समक्ष हमेशा के लिए घुप अंधेरा छा गया तो कई घर तबाह हो गए। जिले में अवैध रूप से नशे की बिक्री धड़ल्ले से होती है। आखिरकार अब सवाल उठता है कि पुलिस-प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद मौत का इंजेक्शन बिकने के लिए जिम्मेदार कौन है।नागरिक अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। अब तक नशा मुक्ति केंद्र में करीब 1500 युवकों को नशे की लत छुड़वाने के लिए भर्ती कराया जा चुका है। विभाग की फॉलोअप रिपोर्ट के मुताबिक 38 युवकों की नशे के कारण मौत हो चुकी है। वहीं, दूसरा पहलू यह भी है कि नशा मुक्ति केंद्र के प्रयास से मई 2018 से लेकर दिसंबर 2022 तक 175 मरीज नशा छोड़ चुके हैं। 257 मरीज दवाई ले रहे थे। इस दौरान 17 युवा ऐसे मिले जो नशा और मेडिसिन दोनों ले रहे थे। इसके अलावा 250 मरीज फॉलोअप रिपोर्ट में नशा लेते मिले।
अब तक नशे से हुई मौतें
3 अगस्त 2023 को भट्टू क्षेत्र निवासी युवक की नशे से मोटरसाइकिल पर ही मौत।
-इसी साल मई माह में एक ही दिन में दो युवकों की मौत हुई थी। नशे से मौत होने की आशंका थी।
- गांव भिरड़ाना में 26 साल के युवक की नशे से मई 2021 में मौत हुई थी।
- वर्ष 2019 में नागरिक अस्पताल के शौचालय में नशे से युवक की मौत हुई।
- वर्ष 2015 में मॉडल टाउन के खंडहर भवन में युवक की नशे से मौत।
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जुलाई माह में ये पकड़ा गया नशा
नशे को लेकर मामले दर्ज : 22
चूरापोस्त : 330 किलो 900 ग्राम
अफीम : 3 किलो 32 ग्राम
हेरोइन : 106.56 ग्राम
गांजा : 31 किलोग्राम
प्रतिबंधित गोलियां : 4730
कोट
नशे से बचाव का उपचार लेने के लिए रोजाना 50 से 60 मरीज आ रहे हैं। जरूरत अनुसार मरीजों को दाखिल भी किया जा रहा है। नशा मुक्ति केंद्र में करीब डेढ़ हजार मरीज दाखिल हो चुके हैं। समय-समय पर इनका फॉलोअप भी लिया जाता है।
-डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक एवं इंचार्ज नशा मुक्ति केंद्र