फतेहाबाद। नगर निकाय के अधिसूचना जारी करने के बाद वर्ष 1975 से पहले आबाद हुईं कॉलोनियों की प्रॉपर्टी से विकास शुल्क वसूला जा रहा है। एनडीसी पोर्टल पर विकास शुल्क का विकल्प नहीं हटाया गया है। एनओसी लेने पर प्रॉपर्टी मालिकों से विकास शुल्क लिया जा रहा है। कारण ये है कि नगर परिषद 18 सालों बाद भी साबित नहीं कर पाया है कि कॉलोनियां वर्ष 1975 से पहले बसी थीं।
पुरानी कॉलोनियों के प्रॉपर्टी मालिकों से शिकायत लेने के लिए बुधवार को जगजीवनपुरा स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल ठाकर बस्ती में शिविर लगाया गया। शिविर में पहले दिन 24 प्रॉपर्टी मालिकों ने शिकायत दर्ज करवाई। ये कैंप नागरिक अधिकार मंच की मांग पर नगर परिषद ने लगवाया। वहीं नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि जो शिकायतें आएंगी उन्हें मुख्यालय में भेजा जाएगा। नगर परिषद के सामने मुसीबत ये है कि कॉलोनियां वर्ष 2004 में नियमित हुई हैं लेकिन ये पहले आबाद हो चुकी हैं और इसका सबूत नहीं है कि ये 1975 से पहले बसी थीं।
1964 में बसी थीं शहर की कई कॉलोनियां
पार्षद मोहन लाल नारंग का कहना है कि नगर परिषद की सीमा के अंदर वर्ष 1975 से पहले पुरानी कॉलोनियों में रिहायशी मकानों पर विकास शुल्क वसूला जा रहा है। निदेशक निकाय विभाग द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र 13 अप्रैल 2006 के अनुसार पुरानी शहरी आबादियों व कॉलोनीयों जो 1975 से पहले वजूद में हैं और नगर परिषद की सीमा के अंदर हैं। इनसे विकास शुल्क नहीं लगना चाहिए जबकि निकाय विभाग के नो ड्यूज वेबसाइट पोर्टल पर विकास शुल्क दर्शाया जा रहा है। शहर की पुरानी रिहायशी कॉलोनी जगजीवनपुरा जो कि 1964 में वजूद में आई थीं। इसके अलावा सुंदर नगर, भीमां बस्ती का क्षेत्र, भांबा राम कॉलोनी, नहर कॉलोनी, पुरानी ठाकुर बस्ती, चार मरला कॉलोनी, का इलाका व लाल डोरे में शामिल रिहायशी मकानों पर निदेशक निकाय विभाग स्पष्टीकरण पत्र अनुसार विकास शुल्क नहीं लगना चाहिए। ये कॉलोनियां वर्ष 1975 से पहले वजूद में हैं। लोगों को मकान बेचते समय एनओसी लेने के लिए विकास शुल्क चुकाना पड़ रहा है।
40 फीसदी प्रॉपर्टी मालिकों को होगा फायदा
एनडीसी पोर्टल पर अगर पुरानी कॉलोनियों के विकास शुल्क का विकल्प हटता है तो करीब 40 फीसदी प्रॉपर्टी मालिकों को फायदा होगा। इन कॉलोनी के प्रॉपर्टी मालिकों विकास शुल्क नहीं देना होगा, अगर जमा हो चुका है तो रिफंड हो सकता है।
अब 20 तक मौका, सर्वे के बाद सिर्फ 10 फीसदी लोगों ने दर्ज करवाई आपत्तियां
नगर परिषद की सीमा बढऩे के बाद उसमें शामिल हुई कॉलोनियों में नगर परिषद द्वारा करवाए गए सर्वे में 10 फीसदी प्रॉपर्टी मालिकों ने आपत्तियां दर्ज करवाई है। इनमें हंस कॉलोनी, स्वामी नगर, हरनाम सिंह कॉलोनी, आदर्श नगर आदि शामिल है। सर्वे के दौरान 12800 प्रॉपर्टी शामिल है। नगर परिषद ने आपत्तियां दर्ज करवाने का पहले 14 जुलाई तक मौका दिया था लेकिन अब इसे 20 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है।
जगजीवनपुरा में 1972 से बना है मकान
जगजीवनपुरा मोहल्ला में 1972 से मकान बना है। नगर परिषद को नोटिफिकेशन के मुताबिक विकास शुल्क हटाना चाहिए। ये पहल नगर परिषद को खुद करनी चाहिए लेकिन उन्हें धक्के खाने पड़ रहे है।
- हरप्रीत, जगजीवनपुरा
प्रॉपर्टी मालिकों पर आर्थिक बोझ
वर्ष 1967 से मकान बना है। करीब 20 मरले जगह है। लेकिन एनडीसी पोर्टल पर विकास शुल्क दर्ज है। इसे हटाना चाहिए ताकि प्रॉपर्टी मालिकों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
- परमवीर, जगजीवनपुरा
सरकार जल्द से जल्द फैसला ले
नगर निकाय द्वारा विकास शुल्क को लेकर वर्ष 2006 में नोटिफिकेशन जारी किया था लेकिन बावजूद इसके पोर्टल पर आज भी पुरानी कॉलोनियां का विकास शुल्क दर्शा रहा है। सरकार इस पर जल्द से जल्द फैसला ले। नागरिक अधिकार मंच की पहल पर शिविर भी लगाया गया है ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके और उनसे शिकायतें ली जाएं।
- राजीव सेतिया, संयोजक, नागरिक अधिकार मंच
लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत
पुरानी कॉलोनियों पर लगाए गए विकास शुल्क हटाने को लेकर पिछले डीसी से मिले थे। इसी के चलते स्कूल में शिविर लगाया गया और लोगों से शिकायतें ली गई हैं। लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है, क्यों कि उन्हें पता नहीं है कि वर्ष 1975 से पहले बसी कॉलोनियों पर विकास शुल्क नहीं लगेगा।
- मोहन लाल नारंग, पार्षद
जिले में प्रॉपर्टी की स्थिति
शहर कुल प्रॉपर्टी
भूना 11465
फतेहाबाद 30507
जाखल मंडी 4669
रतिया 19135
टोहाना 28040
कोट
नगर निकाय की तरफ से अधिसूचना आया हुआ है। लेकिन इसको लेकर साबित भी करना होगा कि कॉलोनी 1975 से पहले बसी थी। इसको लेकर जो शिकायतें आ रही है उन्हें मुख्यालय में भेजा जाएगा और उच्च अधिकारियों से विचार-विमर्श किया जाएगा।
- विकास बजाज, बिल्डिंग इंस्पेक्टर, नगर परिषद