फतेहाबाद। इन्फ्लूएंजा वायरस के अलर्ट और जिले के एक मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बावजूद सरकारी अस्पतालों में अभी तक तैयारियां शुरू नहीं हुई हैं। अस्पताल में न ही फ्लू कॉर्नर एक्टिव हुए हैं और न ही सैंपलिंग शुरू की गई है। इसके अलावा अस्पताल में आने वाले मरीजों और स्टाफ के लिए मास्क भी अनिवार्य नहीं किया गया है। हालांकि सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत ने सोमवार को इन्फ्लूएंजा वायरस के खतरे को देखते हुए सोमवार को कार्यालय में जिले के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों व चिकित्सा अधिकारियों की मीटिंग ली।
अधिकारियों को अपने स्वास्थ्य संस्थाओं में फ्लू कार्नर को एक्टिव करने व इन फ्लू कार्नर पर सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त अस्पतालों में सभी जरूरी दवाइयां पर्याप्त मात्रा में स्टॉक रखने के भी निर्देश दिए है। सिविल सर्जन डॉ. सपना का कहना है कि जिन मरीजों में लक्षण है सिर्फ उन्हीं के सैंपल लिए जाएंगे। विभाग के पास टेमीफलू दवा और सैंपल के लिए किट उपलब्ध है।
तीन माह से बंद है फ्लू क्लीनिक
नागरिक अस्पताल में कोरोना महामारी के दौरान फ्लू क्लीनिक शुरू हुआ था। लेकिन पिछले तीन माह से ये बंद है। कोरोना सैंपलिंग बंद होने के चलते फ्लू क्लीनिक को एक्टिव ही नहीं किया गया है।
अलग से न वार्ड बनाया न ओपीडी शुरू
इन्फ्लूएंजा वायरस को लेकर नागरिक अस्पताल फतेहाबाद में अलग से वार्ड भी नहीं बनाया गया है। इसके अलावा न ही अलग से ओपीडी शुरू की गई है। नागरिक अस्पताल में सोमवार को वायरस को लेकर कोई सैंपल नहीं लिया गया। जिला महामारी रोकथाम विशेषज्ञ का कहना है कि अगर ओपीडी में जांच के दौरान किसी मरीज में लक्षण दिखते हैं तो उसके सैंपल लेकर जांच के लिए अग्रोहा मेडिकल भेजे जाएंगे। अभी तक जिले में कोई सैंपल नहीं लिया गया है।
ये हैं वायरस के लक्षण
सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत ने बताया कि एच3एन2 वेरिएंट का संक्रमण इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण फैलता है। यह एक फ्लू है जिससे संक्रमित होने पर तेज बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, उल्टी, दस्त व ठंड लगना इत्यादि जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। इससे घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि कुछ सावधानियां रखने की आवश्यकता है।
वायरस से बचाव के ये रखें सावधानी
- मास्क पहने व भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचे। क्योंकि यह एक वायरल बीमारी है।
- एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकती है। खांसते व छींकते समय मुंह और नाक ढक कर रखे।
- सार्वजनिक जगहों पर थूकनेे से बचें।
- बार-बार अपनी आंखों और नाक को छूने से बचें।
- कुछ समय के अंतराल में अपने हाथों को पानी व साबुन से रगड़ कर धोए।
- हल्का बुखार या बदन दर्द होने पर पैरासिटामोल लें। तेज बुखार, सांस फूलना व कई अन्य तकलीफ होने पर डॉक्टर की सलाह ले।
- छोटे बच्चों, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं व लम्बे समय से किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
एसएमओ और एमओ की बैठक लेकर अस्पतालों में फ्लू कॉर्नर को एक्टिव करने और सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। जिले में एच3एन2 वेरिएंट का एक केस मिला है जो कि पूरी तरह से स्वस्थ है। स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन