टोहाना। अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा की टीम ने पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली को ज्ञापन दिया। इसमें वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए पंचायत मंत्री की अध्यक्षता में वन्य जीव विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करवाने की मांग की गई।
प्रदेशाध्यक्ष विनोद कड़वासरा ने मंत्री को बताया कि श्री गुरु जंभेश्वर भगवान की शिक्षाओं पर चलते हुए बिश्नोई समाज पारंपरिक रूप से वन्य प्राणियों का संरक्षण कर रहा है। इसी कारण राजस्थान की सीमा से सटे चार जिलों के सैकड़ों गांवों में बिश्नोई समुदाय की बदौलत इलाके में वन्यजीव स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं।
इसके बावजूद राज्य वन्यजीव बोर्ड में बिश्नोई समाज का प्रतिनिधित्व नहीं है और न ही मानद वार्डन नियुक्त किए जा रहे हैं। इस कारण पिछले समय से बढ़ते कृषि क्षेत्र और शहरीकरण के कारण राष्ट्रीय पक्षी मोर, राज्य पशु काला हिरण, राज्य पक्षी तीतर समेत कछुओं की कई प्रजातियां दुर्लभ होती जा रहीं हैं। इसका मुख्य कारण वन्यजीवों के कुदरती पर्यावास खत्म होना, कुत्तों की संख्या बढ़ना, टोपीदार बंदूक से शिकार, बचाव और उपचार केंद्र न होना है। इसके लिए वे कई बार वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों से मिल चुके हैं। तीन बार बैठकें होने के बावजूद वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी मांग पूरी नहीं कर रहे हैं।
गांव बड़ोपल में बनाई जाए एसपीसीए की इन्फरमरी
बिश्नोई सभा ने पंचायत मंत्री को बताया कि प्रदेश के राज्य पशु काला हिरण का सबसे बड़ा आवास गांव बड़ोपल में है। इसलिए पंचायत विभाग ने बड़ोपल गांव में चार एकड़ जमीन पशुपालन विभाग को दी है, जहां पशु मेले के फंड से एसपीसीए कार्यालय, ऑपरेशन थिएटर, आवासीय कक्ष और इन्फरमरी बनाई जाए। इस अवसर पर कृष्ण कुमार, इंद्राज, महेंद्र सिंह, विनोद खिलेरी आदि मौजूद रहे।