फतेहाबाद। जिले में बीते दिनों हुई बारिश के बाद कीटनाशकों और डीएपी की मांग में बढ़ोतरी हुई है। शहर के कीटनाशक विक्रेता सुमित, सुरेंद्र, रवि, राजपाल, सुनील, गुरुदेव और मांगे राम आदि ने बताया कि खरीफ में बारिश के बाद कीटनाशक की मांग बढ़ने के बाद पूर्ति कर पाना मुश्किल हो गया है।
फसलों में वृद्धि का काम करने वाले कीटनाशक में लोहा व जिंक का प्रयोग किया जाता है। इस दवा को किसान ज्यादा खरीद रहे हैं। जिसके कारण बाजार में इसकी आपूर्ति होना मुश्किल हो गया है। वहीं जिले में कुछ स्थानों पर जलभराव होने के कारण मूंग और नरमे की फसलों में फंगस रोग का प्रकोप हो गया है। जिससे फंगी साइड कीटनाशक की मांग में बढ़ोतरी हुई है।
बारिश के बाद कीटनाशकों की मांग में बढ़ोतरी हुई है। जिसके कारण लोहा, जिंक के साल्ट से बनी दवाओं की कमी चल रही है। पिछले वर्ष इस दवा की परिणाम अच्छा रहा था। जिसका प्रभाव के कारण इस बार इसकी मांग ज्यादा है। वहीं किसान डीएपी खाद की मांग कर रहे हैं, मगर डीएपी खाद की कमी के चलते किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।
मंगत मित्तल, कीटनाशक दवा विक्रेता।
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जिले में कुछ स्थानों पर नरमे की फसल में गुलाबी सुंडी का हल्का प्रकोप देखा गया है। इसे स्थेटिक, डिपलोमेट, जश्न और टाटा सुपर दवा नियंत्रण करती है। जिसके कारण इस दवा की मांग बढ़ी है।
सुरेंद्र मित्तल, कीटनाशक दवा विक्रेता।
बारिश के बाद सबसे ज्यादा मांग डीएपी खाद की बढ़ी है। जिसके कारण किसान डीएपी खाद की मांग कर रहे है, मगर सहकारी खाद केंद्रों पर खाद नहीं आने के कारण किसानों को खाली हाथ घर जाना पड़ रहा है।
सुखेदव, कीटनाशक दवा विक्रेता।