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दूध डेयरियों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के छापे, हड़कंप

Thu, 07 Jul 2016 01:15 AM IST
fatehabad
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टीम ने रतिया चुंगी पर दो डेयरियों के लिए सैंपल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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  जिला कष्ट निवारण समिति में सैंपलिंग को लेकर हुए विवाद के बाद हकरत में आए विभाग ने बुधवार को तीसरे दिन रतिया रोड और रतिया चुंगी पर दूध डेयरियों से सैंपल भरे। एक दुकान पर शुरू हुई सैंपलिंग की सूचना के बाद पूरे शहर की दूध डेयरियों पर हड़कंप मच गया। संचालक डेयरियां बंद कर अंडर ग्राऊंड हो गए। डिप्टी सिविल सर्जन डा.गिरीश के नेतृत्व में शुरू हुई कार्रवाही में टीम द्वारा लिए गए सैंपलों को शुक्रवार को लैब में भेजा जाएगा। जहां से इसी माह के अंत तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
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बुधवार सुबह स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम रतिया रोड पर पहुंची। जहां पर विभाग की गाड़ी को देखकर डेयरी संचालक गायब हो गए। इसके बाद टीम के सदस्यों ने रतिया रोड पर विचार आश्रम मंदिर के नजदीक खुली प्रेम डेयरी पर टीम ने दूध का सैंपल लिया। इसी दौरान डेयरी पर पहुंचा एक दूधिया मोटरसाइकिल छोड़कर भाग गया। टीम उसके बाद रतिया चुंगी पर पहुंची। तब तक आसपास की दुकानें बंद हो चुकी थी। रतिया चुंगी पर खुली प्रधान दूध डेयरी का टीम ने निरीक्षण किया और दूध के टैंक से सैंपल भरा। टीम की कार्रवाई को लेकर शहर में हड़कंप की स्थिति रही। जब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम बाजार में रही तब तक डेयरी संचालक दुकानें बंद कर गायब ही रहे तथा मोटरसाइकिल पर दूध बेचने वाले दूधिये भी सड़क पर निकलने से बचते रहे।

सैंपलिंग न करने को लेकर एफएसओ हो चुके हैं सस्पेंड:
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की मीटिंग में सैंपलिंग को लेकर आई शिकायत पर कोई कार्रवाई न होने पर फूड सेफ्टी अफसर शाम लाल को सस्पेंड कर दिया गया था। उसके बाद विभाग बिना एफएसओ के खुद ही सैंपलिंग कर रहा है। हालांकि सैंपलिंग करने के बाद रिपोर्ट पर कार्रवाई केवल एफएसओ ही कर सकता है।
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सैंपलिंग औपचारिकता, खर्चे के बराबर जुर्माना:
स्वास्थ्य विभाग सैंपल भर के जांच के लिए लैब में भेज देता है। सैंपल फेल आने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान एडीसी के पास है। विभाग के अधिकारियों की मानें तो जुर्माना मात्र 1200 रुपये तक ही लगाया जाता है, जबकि एक सैंपल पर आने वाला खर्चा एक हजार रुपये के आसपास है। इसके अलावा अतिरिक्त खर्च अलग से है।

एक दुकान से बोतल में छह सैंपल लिए जाते हैं, जिसमें बोतल की कीमत 150 रुपये के करीब है। विभाग के अधिकारी खुद मानते हैं कि जुर्माना कम होने के कारण संचालक मिलावट करने से डरते नहीं है। जबकि उच्च अधिकारी चाहे तो पांच लाख रुपये तक जुर्माना कर सकते हैं।

बंद डेयरियों पर विभाग की निगाह, पुलिस फोर्स साथ लेकर होगी सैंपलिंग : डिप्टी सिविल सर्जन
 सैंपलिंग के लिए टीम के रवाना होते ही बंद दूध डेयरियों पर विभाग की निगाह गहरी हो गई है। माना यह भी जा रह है कि विभाग के ही कुछ ऐसे कर्मचारी हैं, जो सैंपलिंग की सूचना बाजार तक पहुंचाते हैं। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. गिरीश का कहना है कि सैंपलिंग के लिए पुलिस फोर्स का सहारा लेेंगे और जरूरत पड़ी तो दुकानें खुलवाकर सैंपल भरेंगे।
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