शहर के मॉडल टाउन स्थित पीएसीएल (पर्ल) कंपनी का कार्यालय पिछले दो महीने से बंद होने के चलते निवेशकों की धड़कने बढ़ गई हैं। कर्मचारियों का भी कोई अता-पता नहीं है और न ही कोई नोटिस लगाया गया है। कंपनी में निवेशकों के करोड़ों रुपये जमा हैं। निवेशक पैसे निकलवाने के लिए पिछले दो साल से चक्कर काट रहे थे। कार्यालय के बंद होने के बाद अब निवेशकों को कुछ साफ नजर नहीं आ रहा।
लगभग ढाई साल पहले सेबी ने पीएसीएल खातों को सील कर दिया और दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। जांच का दायरा बढ़ता गया। फतेहाबाद ब्रांच पर्ल कंपनी के कर्मचारियों ने निवेशकों के दस्तावेजों को जमा करना शुरू कर दिया। मामला कोर्ट में जाने के बाद तारीखें मिलती रहीं। पिछले लगभग दो साल से निवेशक आए दिन कंपनी की ब्रांच में पैसों को लेकर चक्कर काटने लगे, लेकिन हर बार निवेशकों को तारीखें ही मिलीं। इधर पिछले दो महीने से मॉडल टाउन स्थित पीएसीएल (पर्ल) कंपनी का ब्रांच कार्यालय बंद पड़ा है। कार्यालय क्यों बंद है इसका जवाब देने वाला भी कोई नहीं है। यहां तक कि कार्यालय के मुख्य गेट पर कोई नोटिस भी नहीं लगा है।
गांव अयाल्की निवासी कर्मचंद ने बताया कि उसने एजेंट के जरिये 50 हजार रुपये जमा करवाए थे। वह दो साल से चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब दो महीने से कार्यालय ही बंद है। अयाल्की के ही राहुल का कहना है कि उसके 70 हजार रुपये तथा राजकुमार का कहना है कि उसके 60 हजार रुपये फंसे हैं। गांव जल्लोपुर निवासी राकेश ने बताया कि 30 हजार रुपये जमा करवाए थे लेकिन अभी तक रुपये नहीं मिले। इंतजार करते-करते अब उम्मीद भी टूट रही है।
6 साल पहले भी हुआ था विवाद, अधिकतर ने निकलवाए थे पैसे
पीएसीएल कंपनी में पैसा डूबने की अफवाह के चलते 50 प्रतिशत के लगभग निवेशकों ने अपना पैसा निकलवा लिया था। इस दौरान निवेशकों को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा था। अब से लगभग ढाई साल पहले सेबी ने पीएसीएल के खातों को सील कर दिया। पैसा न मिलने के कारण मॉडल टाउन स्थित पीएसीएल कार्यालय के बाहर निवेशक कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
मामला संज्ञान में नहीं है। पता करवाता हूं, अगर कोई शिकायत आई है तो खुद इस मामले की जांच करूंगा कि क्या मामला है।
गंगाराम पूनियां
एएसपी फतेहाबाद।