गांव ढिंगसरा में आठ माह पहले सड़क किनारे छोटी झाड़ियां साफ करने की इजाजत लेकर बड़े पेड़ काटने के मामले में गांव के सरपंच पर मामला दर्ज होने के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उधर सरपंच अशोक जाखड़ मामले को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। सरपंच जाखड़ के खिलाफ खुद तहसीलदार नवजीत कौर बराड़ ने जांच करने के बाद भट्टू थाने में शिकायत दी थी और उन्हीं की शिकायत पर सरपंच के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
जानकारी के अनुसार तहसीलदार नवजौत कौर बराड़ ने करीब आठ महीने पहले 7 सितंबर 2016 शिकायत दी थी, जिसमें बताया कि सरपंच ने स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पशु अस्पताल, जलघर व शमशान घाट के रोड पर खड़ी छोटी-छोटी झाड़ियों को साफ करने की इजाजत ली, लेकिन झाड़ियों काटने के साथ जेसीबी से बड़ी संख्या में पेड़ काट दिए गए, जिसमें नीम, कीकर, केर व पहाड़ी कीकर के पेड़ हैं। तहसीलदार ने शिकायत में बताया कि उसने पटवारी से जांच करवाई थी। जिसकी रिपोर्ट में पेड़ काटने का मामला सामने आया है।
अब मामला दर्ज करने पर कार्रवाई न होने की सूरत में गांव के पूर्व सरपंच सुभाष जाखड़, कृष्ण व सुरेंद्र ने आरोप लगाया कि प्रशासन राजनीतिक शह के कारण पूरे मामले को दबा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरपंच ने पटवारी व नंबरदार की रिपोर्ट के अनुसार 115 पेड़ काटे हैं। अब न तो प्रशासन ने कार्रवाई कर रहा, न ही पुलिस। उन्होंने आरोप लगाया कि सरपंच ने पेड़ काट कर उनके निशान भी मिटा दिए।
16 अगस्त को पंचों और ग्रामीणों ने दी थी शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि गत वर्ष 16 अगस्त को कई पंचों व गांव के गणमान्य व्यक्तियों ने सरपंच के खिलाफ लिखित में शिकायत एसडीएम दी थी, एसडीएम ने तहसीलदार को निर्देश दिए थे कि पूरे मामले की जांच करवाए, जिसमें बाद उन्होंने पटवारी के साथ गांव के नंबरदार व वन विभाग से भी जांच करवाई। यहां तक कि वन विभाग की जांच में बताया गया है कि काटे गए पेड़ों की बोली करवाई जाती है तो बोली 46 हजार से शुरू होती। जो कम से कम 2 लाख रुपये तक आसानी से चली जाती।
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। जानकारी लेकर बाद में ही बता पाऊंगा कि मामले का क्या स्टेटस है।
मुकेश, एसएचओ, थाना भट्टू।