हिसार रोड पर लघुसचिवालय के सामने स्थित अस्थायी नंदीशाला में शनिवार को पांच और आवारा नंदी की मौत का मामला सामने आया है। पिछले दिनों अमर उजाला में इस बाबत विशेष खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने अगले ही दिन इस नंदीशाला में मौजूद पौने पांच सौ के करीब सांडों को नई नंदीशाला में शिफ्ट किया था, लेकिन कुछेक नंदी इसी नंदीशाला में ही रखे गए थे। उसमें से ही पांच आवारा नंदी की शुक्रवार रात एवं शनिवार को मौत हो गई। हमेशा की तरह इस बार भी आवारा नंदी का पोस्टमार्टम नहीं किया गया और मृत पशुओं को उठाने वाला ठेकेदार उन्हें अपने कैंटर में लादकर हड्डारोड़ी में छोड़ आया। पोस्टमार्टम नहीं होने से नंदी की मौत का सच तो सामने नहीं आ पाएगा, लेकिन इस मामले में प्रशासन की लापरवाही भी खुले तौर पर सामने आ रही है। जब अधिकतर नंदी को नंदीशाला में ही शिफ्ट कर दिया गया तो बाकी नंदी को भी अगले ही दिन नई नंदीशाला में पहुंचाया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुरानी अस्थाई नंदीशाला में पहले से ही चारे का संकट था। ऐसे में पहले प्लास्टिक खाकर पेट भरने वाले पशुओं को अब नंदीशाला में भी खाने को कुछ नहीं मिला। संभवत: इसी कारण से ही नंदी की मौत हो गई।
अमर उजाला’ ने कुछ दिनों पहले ही ये खबर प्रकाशित किया था कि जिले में रोजाना पांच नंदी की मौत औसतन हो रही है। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा था और अस्थाई नंदीशाला को बंद करने एवं वहां के पशुओं को नई नंदीशाला में शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था। इस बारे में बात करने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त का फोन मिलाया गया लेकिन उनका फोन कवरेज एरिया से बाहर होने के कारण संपर्क नहीं हो सका।