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घर में पड़े खिलौने इशारा करते हैं ध्रुव को परिवार से मिले प्यार का, लेकिन कटर भारी पड़ा प्यार की निशानियों पर

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अमित रूखाया
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फतेहाबाद। गांव हरिपुरा में 30 साल के श्रवण की पहचान आधे से अधिक पलंबरों के गुरु और एक जिम्मेदार पिता की थी। लेकिन रविवार की सुबह श्रवण के लिए एक अलग पहचान लेकर आई। अपनी ही बीवी और चार साल के मासूम बच्चे के कातिल की पहचान। ग्रामीण मृतक बच्चे के शव को देखकर यकीन ही नहीं कर पा रहे कि जिस बच्चे में श्रवण की जान बसती थी, उसने उसे इतनी दर्दनाक मौत दे डाली।
सीन आफ क्राइम टीम के इंचार्ज डा. जोगिंद्र की मानें तो शव की हालत देखकर लग रहा है कि उसके पिता श्रवण ने पहले सोये हुए बच्चे के मुंह में एक कपड़ा ठूंसा और इसके बाद सोये हुए बच्चे की गले पर इलेक्ट्रिक कटर चला दिया। शव की हालत की जांच करने पर पता चलता है कि श्रवण ने बच्चे की गर्दन पर तब तक कटर चलाए रखा जब तक बच्चे की गर्दन कटकर अलग ना हो गई।
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श्रवण के घर में रखे हुए खिलौने भी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि एलकेजी में पढ़ने वाला बेटा ध्रुव घर में सभी का लाडला था। घर के आंगन में पड़ी छोटी साइकिल, घर की फ्रिज पर रखा टेडीबियर, कमरे के कोने में पड़े ध्रुव के जूतों के तीन जोड़े ये जताने को काफी है कि घर में उसकी हर फरमाइश पूरी की जाती थी। लेकिन वहीं पास में पड़ा इलेक्ट्रिक कटर, प्यार की बाकी सब निशानियों पर भारी पड़ गया। इस कटर के ब्लेड पर मासूम ध्रुव के खून के निशान सूख चुके हैं और इसी के साथ एक हंसता-खेलता परिवार घरेलू कलह और शक के बीच पिसकर खत्म हो चुका था।
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यह कहना है मनोविज्ञानी का
गुस्सा हमेशा विनाशक होता है। खासकर गुस्सा जब कई दिनों से दिल के अंदर भरता रहा हो, तभी इतना क्रूर रूप लेता है। इस केस में भी ऐसा ही कुछ लगता है। गुस्सा इस कदर दिलोदिमाग पर हावी हुआ लगता है कि जिसने चार साल के मासूम बच्चे को भी नहीं बख्शा। इस तरह के मामलों में अक्सर वारदात करने के बाद व्यक्ति को अहसास होता है कि उसके हाथों क्या अनर्थ हो गया।
- पायल कक्कड़, प्रसिद्ध मनोविज्ञानी, फतेहाबाद ।
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