फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जोर्डन जाने की धुन में दो बार खुद का बनवाया फर्जी पासपोर्ट, तीसरी बार में चढ़ा हत्थे, अब दो साल की सजा

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

फतेहाबाद। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने फर्जी पासपोर्टं बनवा कर विदेश में नौकरी करने वाले गांव भोडिया निवासी सुनील और उसके पासपोर्ट के कागजात सत्यापन करने वाले गांव भोडिया के मदनलाल पुत्र भाल सिंह व सतपाल पुत्र महाबीर को दो-दो साल कैद व 600-600 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में शहर फतेहाबाद पुलिस ने पासपोर्ट कार्यालय चंडीगढ़ से मिली रिपोर्ट के बाद सुनील, सतपाल व मदनलाल के विरुद्ध फर्जीवाड़े के आरोप में धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी व 12 बी पासपोर्ट एक्ट के तहत 26 फरवरी 2015 को केस दर्ज किया था।
पासपोर्ट फर्जीवाड़े का ये किस्सा बेहद रोचक भी है। सुनील कुमार पर जोर्डन जाने का ऐसा जनून चढ़ा था कि उसने इसके लिए दो बार पासपोर्ट बनवाया और दोनों बार अलग-अलग नाम से पासपोर्ट बनवाने के लिए आवश्यक कागजों में कटिंग कर फ्रॉड किया। इतना ही नहीं, दोनों बार वह अपने काम में कामयाब होकर जोर्डन तक पहुंच गया और कुछ समय तक वहां रहा भी सही। लेकिन दोनों बार उसे जोर्डन से जबरदस्ती वापस भेज दिया गया। लेकिन इतने पर भी उसे तसल्ली नहीं हुई तो तीसरी बार उसने फिर से पासपोर्ट बनवाने का प्रयास किया।
विज्ञापन

मिली जानकारी के अनुसार गांव भोडिया निवासी सुनील कुमार ने 7 जून 2002 को पासपोर्ट कार्यालय चंडीगढ़ से साल 2012 तक वेलिड अपना पासपोर्ट बनवाया था। इस पासपोर्ट के आधार पर सुनील 5 दिसंबर 2005 को एक महीना घूमने के लिए विदेश गया। सुनील जोर्डन में रहकर नौकरी करने लगा। कुछ समय बाद वह जोर्डन में अवैध रूप से रहते हुए पकड़ा गया और जोर्डन सरकार ने उसे 30 अगस्त 2007 को उसके पासपोर्ट पर 5 साल का बैन लगाकर उसे भारत डिपोर्ट कर दिया। भारत आने पर सुनील कुमार ने अपने राशनकार्ड व अन्य प्रमाण पत्रों में अपना नाम सुनील की जगह अनिल करके 31 जनवरी 2008 को अनिल के नाम पर नया पासपोर्ट हासिल कर लिया और एक बार फिर जोर्डन जा पहुंचा। अनिल जोर्डन में 4 साल तक अवैध रूप से रहकर नौकरी करता रहा। 22 सितम्बर 2012 को वह दोबारा जोर्डन में पकड़ा गया और जोर्डन सरकार ने उसके अनिल कुमार वाले पासपोर्ट पर भी 5 साल का बैन लगाकर उसे फिर भारत भेज दिया।
भारत आने के बाद सुनील कुमार ने एक बार फिर जोर्डन जाने की योजना बनाई और 2014 तक वेलिड अपने असली पासपोर्ट को रिन्यू करवाने के लिए चंडीगढ़ पासपोर्ट कार्यालय को आवेदन किया। सुनील कुमार ने अपने असली पासपोर्ट को रिन्यू करवाने के लिए पासपोर्ट कार्यालय चंडीगढ़ को एक शपथ पत्र दिया कि उसका सुनील कुमार नाम वाला पासपोर्ट गुम हो गया था। पासपोर्ट के लिए आवश्यक जांच में गड़बड़ सामने आने के बाद सुनील कुमार के इस शपथ पत्र के पास पासपोर्ट कार्यालय चंडीगढ़ ने इस मामले की एक रिपोर्ट बनाकर फतेहाबाद शहर पुलिस को दे दी।
विज्ञापन

शहर पुलिस ने इस मामले की जांच करने पर फर्जीवाड़ा पाए जाने पर सुनील कुमार व उसके फर्जी कागजात का सत्यापन करने वाले सतपाल व मदनलाल के विरुद्ध केस दर्ज कर 30 मार्च 2015 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने अदालत से रिमांड लेकर मामले की जांच की तो पाया कि सुनील कुमार ने अपने राशन कार्ड, आधार कार्ड व मैट्रिक के प्रमाण पत्र में खुद कटिंग कर अपना नाम सुनील कुमार से अनिल कुमार किया। इसके बाद लंबी अदालती कार्रवाई के बाद शुक्रवार को तीनों आरोपियों को दो-दो साल की कैद सुनाई गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें