फतेहाबाद। नगर परिषद की हाउस बैठक में पार्षदों ने विकास कार्यों को लेकर जो एजेंडे दिए थे, उनको लेकर सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे में अगर गली निर्माण जरूरी होगा तो ही एस्टीमेट नगर परिषद अधिकारी तैयार करेंगे। अगर जरूरत नहीं है और मरम्मत से ही काम चलेगा तो उसका निर्माण नहीं होगा। नगर परिषद अधिकारियों ने सर्वे के साथ फोटोग्राफी भी शुरू करवाई है।
नगर परिषद टीम ने इसको लेकर वार्ड नंबर 1 से 27 तक में सर्वे व फोटोग्राफी शुरू कर दी है। सर्वे के दौरान संबंधित गली की लंबाई-चौड़ाई भी रिकॉर्ड में ली जाएगी। नगर परिषद अधिकारियों ने विवाद से बचने के लिए फोटोग्राफी भी शुरू करवाई है। बता दें कि नगर परिषद हाउस बैठक 21 अक्टूबर को प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची की अध्यक्षता में निजी होटल में हुई थी। बैठक में कई पार्षदों ने वार्ड में विकास कार्यों को लेकर भेदभाव के आरोप लगाए थे। पार्षदों के आरोप थे कि पिछली बैठक में जो उन्होंने एजेंडे दिए थे, उनके एस्टीमेट तैयार नहीं हुए और न ही टेंडर लगाए गए हैं। इसी के चलते नगर परिषद अब सभी वार्डों में सर्वे करवा रहा है ताकि पता चल पाए कि पार्षद द्वारा जो गली निर्माण के लिए एजेंडे में दी गई है वह बनने लायक है या नहीं है। अगर दोबारा बनने लायक है तो उसका एस्टीमेट कितना होगा।
आज खुलने हैं 2.90 करोड़ के 17 टेंडर
नगर परिषद ने 22 अक्टूबर को वार्ड नंबर 1, 2, 3, 4, 5, 7, 8, 10, 12, 13, 18, 21 और 25 के 17 टेंडर लगाए थे। ये टेंडर गलियों के निर्माण को लेकर है। नगर परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक 17 टेंडर 2 करोड़ 90 लाख के है। इन वार्डों में 2 करोड़ 90 लाख से गलियों का निर्माण व मरम्मत कार्य होने हैं। नगर परिषद ये टेंडर 10 अक्टूबर को खोलेगा। इसके अलावा डोर टू डोर कचरा उठान का टेंडर भी 15 अक्टूबर को खोला जाना है।
विवादित गली का 19 हजार फुट निर्माण के बाद रोका काम
नगर परिषद द्वारा बीघड़ चौक से शमशान भूमि वाली गली का टेंडर लगाया गया था। इंटरलॉकिंग गली को उखाड़कर दोबारा बनाया जाना था। लेकिन लोगों के विरोध के चलते निर्माण को आधा अधूरा पूरा करने के बाद रोक दिया गया है। ठेकेदार के मुताबिक 19 हजार फुट एरिया तक का निर्माण हुआ है। इसके बाद लोगों की मांग है कि सीसी बनाई जाए।
कोट
पार्षदों ने बैठक में विकास कार्यों को लेकर जो एजेंडे दिए हैं उसका सर्वे चल रहा है ताकि पता चल पाए कि गली का निर्माण जरूरी है या नहीं, अगर मरम्मत से काम चल सकता है मरम्मत करवाई जाएगी। इसके बाद एस्टीमेट मंजूरी के लिए अधिकारियों को भेजे जाएंगे।
-राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान, नगर परिषद