डिवायाराम के अनुसार पाकिस्तान की संसद में अल्पसंख्यकों के लिए कुछ पद आरक्षित होते हैं। इसी के तहत उन्हें सांसद बनाया गया। डिवायाराम ने भारत में आने का कारण बताते हुए कहा कि उन पर वहां पर एक धर्म विशेष के लोग बेतहाशा अत्याचार करते थे। उन्होंने बताया कि उनके सांसद बनने के बाद भी वहां के दबंग लोगों ने उनके परिवार की एक लड़की को उठा लिया और अत्याचार किए और सत्ता में होने के बावजूद वे कुछ नहीं कर पाए, इससे हताश होकर उन्होंने कुछ ही दिनों में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
डिवायाराम ने बताया कि आए दिन हो रहे अत्याचारों से तंग आकर वे और उनका परिवार वीजा लेकर इंडिया आ गए और अपने पीछे अपनी तमाम संपत्ति, जमीन जायदाद छोड़कर आए। उन्होंने बताया कि इंडिया आने के बाद वे पहले कुछ समय तक रोहतक जिले में रहे। जहां वीजा अवधि समाप्त होने के बाद वे पाकिस्तान नहीं लौटे और वहां के तत्कालीन उपायुक्त के समक्ष पेश होकर भारत में रहने की अनुमति मांगी।
इसके बाद वे वर्ष 2006 में फतेहाबाद के रतिया कस्बे के निकट गांव रतनगढ़ में आकर रहने लगे। 74 वर्षीय डिवायाराम व पाकिस्तान से आकर बसे अन्य परिवार के लोगों ने बताया कि पाकिस्तान में एक धर्म विशेष के लोगों द्वारा प्रताड़ित करने के कारण उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा।
वे लोग उन्हें हिंदू धर्म छोड़ उनका धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाते। जब उन्होंने इससे मना कर दिया तो उक्त लोगों ने कई तरह से शोषण करना शुरू कर दिया। मजबूरन जमीन व घर छोड़ भारत आना पड़ा। उन्होंने बताया कि विधेयक पेश होने से वे खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि अब भारत की नागरिकता मिल जाएगी।