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पाक के पूर्व सांसद ने बताई अत्याचार की कहानी, अब हरियाणा में करते हैं मजदूरी, CAB पर हुए खुश

Thu, 12 Dec 2019 11:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतिया (हरियाणा)
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पाकिस्तान से आए परिवारों ने खुशी में बांटी मिठाई।
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नागरिकता संशोधन बिल पास होन के बाद अत्याचार से तंग आकर भारत में बसे पाक से आए परिवारों में खुशी का माहौल है। रतिया, गांव रतनगढ़, जल्लोपुर और आसपास के इलाकों में बसे इन परिवारों ने गुरुवार को रतिया की बड़ी नहर के पास लड्डू बांटकर व तिरंगा झंडा हाथों में लेकर खुशी का इजहार किया। इन परिवारों में बेनजीर भुट्टो की सरकार के समय पाकिस्तान के सांसद रहे डिवायाराम भी शामिल थे।

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खुशी का इजहार करते हुए डिवाया राम, सोहना राम, ओम प्रकाश, पप्पू राम, संजीव, माना सिंह सोनू आदि ने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास हो जाने से उन्हें आस जगी है कि अब भारत की नागरिकता मिल जाएगी।

डिवायाराम व उनके साथ रह रहे विभिन्न परिवार साल 2000 में वीजा लेकर पाकिस्तान से भारत आए थे। वीजा अवधि खत्म होने के बाद यहीं बस गए। डिवायाराम रतिया क्षेत्र के गांव रतनगढ़ में मजदूरी करके अपना और परिवार का भरण पोषण करते हैं और शेष कुछ परिवार रतिया व आसपास के कुछ अन्य गांवों में रह रहे हैं। डिवायाराम पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो के शासनकाल में सांसद  भी रह चुके हैं।

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यह कहना है पाकिस्तान के पूर्व सांसद का

डिवायाराम के अनुसार पाकिस्तान की संसद में अल्पसंख्यकों के लिए कुछ पद आरक्षित होते हैं। इसी के तहत उन्हें सांसद बनाया गया। डिवायाराम ने भारत में आने का कारण बताते हुए कहा कि उन पर वहां पर एक धर्म विशेष के लोग बेतहाशा अत्याचार करते थे। उन्होंने बताया कि उनके सांसद बनने के बाद भी वहां के दबंग लोगों ने उनके परिवार की एक लड़की को उठा लिया और अत्याचार किए और सत्ता में होने के बावजूद वे कुछ नहीं कर पाए, इससे हताश होकर उन्होंने कुछ ही दिनों में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

डिवायाराम ने बताया कि आए दिन हो रहे अत्याचारों से तंग आकर वे और उनका परिवार वीजा लेकर इंडिया आ गए और अपने पीछे अपनी तमाम संपत्ति, जमीन जायदाद छोड़कर आए। उन्होंने बताया कि इंडिया आने के बाद वे पहले कुछ समय तक रोहतक जिले में रहे। जहां वीजा अवधि समाप्त होने के बाद वे पाकिस्तान नहीं लौटे और वहां के तत्कालीन उपायुक्त के समक्ष पेश होकर भारत में रहने की अनुमति मांगी। 

इसके बाद वे वर्ष 2006 में फतेहाबाद के रतिया कस्बे के निकट गांव रतनगढ़ में आकर रहने लगे। 74 वर्षीय डिवायाराम व पाकिस्तान से आकर बसे अन्य परिवार के लोगों ने बताया कि पाकिस्तान में एक धर्म विशेष के लोगों द्वारा प्रताड़ित करने के कारण उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। 

वे लोग उन्हें हिंदू धर्म छोड़ उनका धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाते। जब उन्होंने इससे मना कर दिया तो उक्त लोगों ने कई तरह से शोषण करना शुरू कर दिया। मजबूरन जमीन व घर छोड़ भारत आना पड़ा। उन्होंने बताया कि विधेयक पेश होने से वे खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि अब भारत की नागरिकता मिल जाएगी।
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