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Fatehabad News: एक साल में पांच लाख तक के ही काम करवा पाए गांवों के चौधरी

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गांव मेहूंवाला में जलखुंबी से भरा तालाब, जिसकी सफाई नहीे हो सकी।
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फतेहाबाद। गांव की सरकार बने एक साल हो गया है, लेकिन बड़ी परियोजनाओं पर काम नहीं हो रहे हैं। काम हो भी रहे हैं तो केवल छोटे कामों के लिए, जोकि ग्राम पंचायत की हद में आते हैं। पांच लाख से अधिक के कामों के लिए सरपंचों को बार-बार पंचायती राज विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अब तक 230 कामों के प्रस्ताव पंचायती राज विभाग को मिल चुके हैं, जिनमें से सिर्फ 191 पर ही काम शुरू हो पाया है। कई प्रस्तावों को पास करने में तो छह-छह माह लग जाते हैं।
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ज्ञात रहे कि पहले सरकार ने सरपंचों को सिर्फ दो लाख रुपये तक के कार्य करने की पावर दी थी। जिस पर सरपंचों ने काफी हंगामा भी किया था। जिसके चलते सरकार ने सरपंचों को अपने स्तर पर पांच लाख रुपये तक के काम करवाने की पावर दी थी। पांच लाख से अधिक के काम ई-टेंडरिंग के माध्यम से होंगे। बड़ी पंचायतों का बजट 25 लाख रुपये रखा गया था और यह काम भी ई-टेंडरिंग व कोटेशन के माध्यम से होने हैं। सरपंचों को एक साल में पांच लाख तक के केवल पांच काम करवाने की ही अनुमति मिली हुई है। बाकी काम टेंडर के माध्यम से ही होने हैं।
यहां गौर लायक बात यह है कि जो काम सरपंचों के माध्यम से हो रहे हैं, उन पर कम लागत आ रही है, लेकिन टेंडर के माध्यम से हो रहे कामों पर अधिक राशि खर्च हो रही है। गांव धारनियां के सरपंच हनुमान पोटलिया ने बताया कि ग्राम पंचायत के फंड के माध्यम से उन्होंने गांव में खाले की पाइप लाइन बिछाई थी, जिस पर पौने पांच लाख रुपये का खर्चा आया था। इसके बाद टेंडर के माध्यम से खाले के लिए जो पाइप लाइन बिछाई गई, जोकि ग्राम पंचायत द्वारा बिछाई गई पाइप लाइन से छोटी थी, फिर भी इस पर साढ़े पांच लाख रुपये का खर्चा दिखाया गया।
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15 दिन में काम शुरू न होने के कारण 30 काम हुए खत्म
जिले के सात खंडों की ग्राम पंचायतों द्वारा पांच लाख से अधिक के कामों के लिए 230 प्रस्ताव पंचायती राज विभाग को भेजे गए हैं। इन कामों में से 205 कामों को मंजूरी मिली है तो 191 पर काम अब आरंभ हुआ है। टेंडर जारी होने के 15 दिन के भीतर ही काम आरंभ करना होता है, लेकिन टेंडर भरने के बाद भी कुछ एजेंसियों ने काम शुरू नहीं किया और 30 काम इसके चलते लैप्स हो गए हैं।


पांच लाख से अधिक के काम न होने से सरपंच परेशान
ग्राम पंचायत द्वारा पांच लाख रुपये के जो प्रस्ताव पास किए गए हैं, उन पर तो काम हो रहे हैं, लेकिन इससे अधिक बजट के कामों पर ई-टेंडरिंग होने पर भी काम आरंभ नहीं हो रहे हैं। पांच लाख से अधिक के कामों के लिए ई-टेंडरिंग के माध्यम से प्रस्ताव भी डाल दिए गए हैं और पंचायतों के खातों से रुपये भी कट रहे हैं, लेकिन काम आरंभ नहीं हो रहे।
मोहन गढ़वाल, प्रधान सरपंच एसोसिएशन


छह माह बाद जारी किया टेंडर
गांव में धानक चौपाल के लिए मार्च महीने में 6 लाख का टेंडर लगाने के लिए प्रस्ताव पास किया गया था। छह महीने के इंतजार के बाद इसका टेंडर लगाने की प्रक्रिया आरंभ की गई। पहले यहां पर शेड बनाने की बात कही गई, लेकिन जब इमारत ही नहीं थी तो शेड का फायदा नहीं था। अब जाकर चौपाल बनाने का टेंडर पास हुआ है।
हनुमान पोटलिया, सरपंच, गांव धारनियां



अधिकारी लगाते हैं डोंगल खराब होने का बहाना
गांव भूथन कलां में सड़क निर्माण के लिए साढ़े 13 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा था। इसके लिए कभी अधिकारी का डोंगल काम नहीं करता तो कभी बीडीपीओ की बदली हो जाती है। लंबे समय से यह टेंडर रुका हुआ है। मेरे गांव में पांच हजार मतदाता हैं, जिनमें आधे मतदाता ढाणियों में रहते हैं, वहां काम ही नहीं हो रहे हैं।
-रामनिवास, सरपंच, गांव भूथन कलां

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ऐसा नहीं है कि पांच लाख तक के ही काम हो रहे हैं। अगर पांच लाख से अधिक के कामों की ई-टेंडरिंग हुई है तो काम आरंभ किए जा रहे हैं। कुछ शिकायत हो सकती है। जिन पंचायतों के सामने ऐसी समस्या आ रही है, वे संपर्क कर सकते हैं।
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-देवेंद्र कुमार, कार्यकारी अभियंता, पंचायती राज, फतेहाबाद।
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