फतेहाबाद। कभी हिसार का हिस्सा रहा फतेहाबाद जिला बनने से लेकर अब तक विकास के पथ पर अग्रसर है। नहरों ने यहां खुशहाली बढ़ाई है। टोहाना में भाखड़ा तो रतिया व जाखल में घग्गर नदी खेती किसानी को मजबूत बनाती हैं। जिले की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यहां हर 20 किलोमीटर पर बोली बदल जाती है। जिले में तीन तरह की प्रमुख भाषा बोली जाती है। भट्टू क्षेत्र में जहां पूरी तरह बागड़ी बोली में बातचीत होती है, वहीं रतिया, जाखल व टोहाना में पंजाबी बोलचाल का माध्यम है। फतेहाबाद शहर में मुल्तानी भाषा बोलने वालों की संख्या खूब है। संवाद
जिले में हो रहा तीन राज्यों का मिलन
फतेहाबाद जिले में तीन राज्यों का मिलन होता है। एक तरफ पंजाब का बॉर्डर लगता है, तो दूसरी तरफ राजस्थान की सीमा है। बीच में हरियाणा का फतेहाबाद बसा है। इस कारण इन तीनों प्रदेशों की संस्कृति का मेल यहां देखने को मिलता है।
भाखड़ा ने बदली किसानों की जिंदगी
फतेहाबाद जिले की तस्वीर सही मायने में भाखड़ा नहर से बदली गई है। भाखड़ा बांध पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के लिए अमूल्य देन है। इस बांध का निर्माण कार्य भी टोहाना के रहने वाले रायबहादुर कंवर सेन की देखरेख में हुआ था। इंजीनियर कंवर सेन ने पहले 1940-41 में रोहतक में आई भयंकर बाढ़ का समाधान ढूंढा, तो उन्हें राय बहादुर का खिताब मिला। 1945-46 में जब भाखड़ा बांध की परियोजना बनी तब इस पूरे क्षेत्र में पानी की कमी थी और यहां रेतीले टिब्बे थे। कंवर सेन की बदौलत टोहाना क्षेत्र से होकर भाखड़ा नहर निकली। आजादी के बाद भाखड़ा बांध का निर्माण हुआ और 1953 में भाखड़ा नहर में पानी छोड़ा गया। इसी भाखड़ा नहर के सहारे धीरे-धीरे क्षेत्र की तस्वीर बदलती गई और रेतीले टिब्बों की जगह लहलहाती फसलों ने किसान की तकदीर लिखी।
शांत वातावरण के कारण कर्मचारियों की पहली पसंद
फतेहाबाद जिला शांत वातावरण के कारण कर्मचारियों की पहली पसंद है। यहां के लोग बेहद नरम स्वभाव के हैं। यही कारण है कि जो अफसर या कर्मचारी स्थानांतरण के बाद आते हैं, वे ज्यादातर यहीं के होकर रह जाते हैं। फतेहाबाद शहर में बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्ग रिहायश करता है, जो मूलरूप से दूसरे जिलों के रहने वाले हैं।
कोट
फतेहाबाद में हरियाणा, पंजाब व राजस्थान की मिलीजुली संस्कृति देखने को मिलती है। भट्टू में बागड़ी, फतेहाबाद में मुल्तानी, रतिया-जाखल व टोहाना में पंजाबी भाषा बोलचाल का हिस्सा है।
-देवेंद्र सिंह दहिया, वरिष्ठ शिक्षाविद