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आजादी से पहले जहां फतेहाबाद में बनती थी घोड़े की काठियां, अब फुटवियर उद्योग ने ली जगह

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लकड़ी की काठी का फाइल फोटो - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। समय चक्र घूमा तो देश में विकास की बयार बही। इसी बयार में देश गुलामी की जंजीर तोड़कर अपने लिए नित नई इबारत लिखने लगा। देश के आजाद होने से पहले शहर फतेहाबाद में घोड़े की काठी बनती थी। इन काठी की पहचान आसपास ही नहीं बल्कि उस समय के संयुक्त हिंदुस्तान के दूसरे प्रांतों में भी थी।
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उस समय हिंदुस्तान के मुल्तान शहर (अब पाकिस्तान) से घोड़ा पालक फतेहाबाद में विशेष तौर पर घोड़े की काठी लेने आते थे। मगर जब देश में विभाजन की लकीर खिंची तो इस कला को जानने वाले फतेहाबाद से पाकिस्तान चले गए। धीरे-धीरे दौर बदला तो विकास का पहिया चला और शहर में अब नई कला विकसित हो गई। काठी बनाने वाला शहर फतेहाबाद अब फुटवियर उद्योग में अग्रणी बना हुआ है। यहां पर बने फुटवियर हरियाणा ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों दिल्ली, राजस्थान व पंजाब तक सप्लाई होते हैं। इतिहासकारों की मानें तो फतेहाबाद में जहां घोड़े की काठी बनाने का बड़ा कारोबार था, वहीं ऊंट के चमड़े से तराजू के पलड़े बनाने व तेल भरने के लिए इन्हीं चमड़ों से कूपे बनाने का काम भी होता था।
घोड़े रखने के शौकीन आते थे काठी लेने
मुल्तान क्षेत्र तक के घोड़े रखने के शौकीन फतेहाबाद में बनने वाली घोड़े की काठी लेने आते थे। इसके अलावा पंजाब, हिमाचल व राजस्थान के लोग भी घोड़े की काठी को यहां से लेकर अपने क्षेत्रों में व्यापार करते थे। घोड़े की काठी का जिले में काफी व्यापार होता था। बताया जाता है कि फतेहाबाद में बनने वाली घोड़े की काठी काफी मजबूत होती थी। इसकी क्वालिटी भी लाजवाब होती थी। यही कारण है कि दूर दराज के लोग यहां पर काठी खरीदने आते थे। इसकी बनाने की जगह शहर के जवाहर चौक स्थित पशु अस्पताल के स्थान पर होती थी।
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एक कला गई तो दूसरी का हुआ उद्भव
फतेहाबाद में आजादी के साथ अगर घोड़े की काठी की कला गई तो यहां पर फुटवियर उद्योग ने अपनी दस्तक दी। राजस्थान के नोहर व भादरा से अनेक कारीगरों ने पहले यहां पर हाथों से फुटवियर बनाने का काम शुरू किया। पंजाब से अलग होकर हरियाणा बनने के बाद 1980 में यहां पर इन कारीगरों की संख्या बढ़ने लगी। फतेहाबाद में होममेड फुटवियर का बोलबाला रहा। स्थानीय फुटवियर विक्रेताओं को भी बाहर से सामान लाने की जरूरत महसूस नहीं हुई। डेढ़ दशक पहले शहर में फुटवियर के छोटे-छोटे उद्योग लगने लगे और अब इन्होंने बड़ी उद्योगों का रूप ले लिया है। इस समय फतेहाबाद में फुटवियर के सात बड़े और 15 छोटे उद्योग हैं। इन उद्योगों में 500 से 800 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
दूसरे राज्यों में जाते हैं फुटवियर
फतेहाबाद की फुटवियर कंपनी के मालिक शैलेंद्र मदान ने बताया कि फतेहाबाद में फुटवियर उद्योग पिछले डेढ़ दशक में काफी उभरा है। पहले उनके पिता का छोटा सा कारखाना था, जो अब बड़ी फैक्टरी में बदल गया है। उन्होंने बताया कि फतेहाबाद से पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि, राजस्थान, दिल्ली व पंजाब तक फुटवियर की सप्लाई हो रही है।
फतेहाबाद शहर का इतिहास काफी पुराना है। कभी फतेहाबाद घोड़े की काठी बनाने, ऊंट के चमड़े से पलड़े व कूपे बनाने के लिए मशहूर था। यहां की पुरानी तहसील चौक से ऊंचाई पर जालू डबगर नामक कारीगर इसके लिए काफी प्रसिद्ध था। वह दरियां व खेस बनाता था, जो उस समय में काफी प्रसिद्ध थे। विभाजन के बाद जब इनके जानने वाले चले गए तो यह सभी कलाएं शहर से धीरे-धीरे गायब होने लगी।
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- डॉ. राजेंद्र गर्ग, इतिहासकार, फतेहाबाद

इंडस्ट्रियल एरिया में मशीन पर काम करता मजदूर- फोटो : Fatehabad

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