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Fatehabad News: रतिया में ज्ञानचंद के अलावा लगातार कोई दो बार नहीं जीत सका विधायक

Thu, 19 Sep 2024 02:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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ज्ञानचंद ओड। फाइल फोटो
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फतेहाबाद। जिले की अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित एकमात्र विधानसभा सीट रतिया में लगातार दो बार जीतकर विधायक बनने का रिकॉर्ड सिर्फ ज्ञानचंद ओड के नाम है। ज्ञानचंद के अतिरिक्त पीरचंद और जरनैल सिंह भी दो-दो बार विधायक बने हैं। मगर वह लगातार नहीं जीत सके। पीरचंद को एक बार जीतने के बाद दूसरी बार जीतने में 14 साल लगे जबकि जरनैल सिंह को दूसरी बार विधायक बनने में 11 साल लगे।
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दरअसल, पंजाब बॉर्डर के साथ रतिया क्षेत्र लगता है। इस कारण यहां मिली-जुली संस्कृति है। अधिकांश गांवों में पंजाबी भाषा बोली जाती है, जबकि कुछ गांवों में हरियाणवी हिंदी भाषी लोग भी रहते हैं। सबसे बड़ा वोट बैंक अनुसूचित जाति वर्ग का है। 1977 से अब तक यहां 11 चुनाव हो चुके हैं। इनमें से चार बार इनेलो जीती है। तीन बार कांग्रेस, दो बार हरियाणा विकास पार्टी और एक-एक बार जनता पार्टी व भाजपा जीत पाई है।
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रतिया में 1987 के बाद 24 साल में जीत पाई कांग्रेस रतिया विधानसभा क्षेत्र में पहली बार कांग्रेस 1982 के चुनाव में जीती थी। तब कांग्रेस के नेकीराम विधायक बने थे। इसके बाद कांग्रेस को 1987 में भी जीत मिली। उस चुनाव में आत्मा सिंह विधायक चुने गए थे। 1987 की जीत के बाद फिर से कांग्रेस को जीतने में 24 साल लग गए। 1987 के बाद 1991 और 1996 में दो बार लगातार हरियाणा विकास पार्टी जीती। फिर 2000 से लेकर 2011 तक लगातार इनेलो के विधायक रहे। 2011 में तत्कालीन इनेलो विधायक ज्ञानचंद ओड के निधन के बाद हुए उपचुनाव में इनेलो ने उनकी पत्नी को मैदान में उतारा था, लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार जरनैल सिंह ने जीत हासिल की थी। इस तरह 24 साल बाद कांग्रेस को जीत नसीब हो पाई।
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अब दस साल से फिर कांग्रेस जीत के लिए तरस रही
2011 में भी जीतने के बाद रतिया में कांग्रेस की सत्ता महज तीन साल ही रही। इसके बाद लगातार दस साल से जीत के लिए कांग्रेस तरस रही है। 2014 में हुए आम चुनाव में इनेलो के प्रो. रविंद्र सिंह बलियाला ने जीत हासिल की जबकि 2019 के चुनाव में पहली बार भाजपा ने जीत का खाता खोला। साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस तीसरे जबकि साल 2019 में दूसरे नंबर पर रही थी। पिछले 15 साल से रतिया में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व जरनैल सिंह ही कर रहे हैं। वह कांग्रेस की टिकट पर 2009, 2011, 2014 व 2019 में भी चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार पांचवीं बार पार्टी ने उन्हें टिकट देकर मैदान में उतारा हुआ है। हालांकि, ज्ञानचंद ओड का परिवार भी इस समय कांग्रेस में ही है।

अब तक रहे रतिया के विधायक
1977 - पीरचंद - जनता पार्टी
1982 - नेकीराम - कांग्रेस
1987 - आत्मा सिंह - कांग्रेस
1991 - पीरचंद - हरियाणा विकास पार्टी
1996 - रामसरूप रामा - हरियाणा विकास पार्टी
2000 - जरनैल सिंह - इनेलो
2005 - ज्ञानचंद - इनेलो
2009 - ज्ञानचंद - इनेलो
2011 (उपचुनाव) - जरनैल सिंह
2014 - प्रो. रविंद्र बलियाला - इनेलो
2019 - लक्ष्मण नापा - भाजपा
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:: रतिया विधानसभा सीट पर ज्यादा बार इनेलो ही जीती है। लंबे समय तक चौटाला परिवार का प्रभाव यहां पर रहा है। साल 2019 में पहली बार भाजपा का खाता खुला था। इस बार भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला नजर आ रहा है।
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-देवेंद्र सिंह, राजनीतिक विशेषज्ञ, फतेहाबाद
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