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कर्ण कोट टीले से मिले आंग्लो-सिख युद्ध के समय के तोप के गोले

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फतेहाबाद के कर्ण कोट मिले से मिली कांच की चूड़ियां व खिलौने के अवशेष। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। जिले में पुरातात्विक महत्व के गढ़ बने गांव बुआन भट्टू के कर्ण कोट टीले से पौराणिक महत्व के अनेकों सामान मिल रहे हैं। शनिवार को यहां पर आंग्लो-सिख युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा तोप के लिए प्रयोग किए गए लोहे के गोले मिले हैं। इसके अलावा बच्चों के खिलौनों के अलावा यहां पर धातु तराशने के लिए प्रयोग की जाने वाली पत्थर की रेती और कांच की चूड़ियां भी मिली हैं।
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फतेहाबाद के बुआन भट्टू में हाल ही में बारिश होने के बाद करीब आठ फुट की गहराई से शिवलिंगनुमा पत्थर मिला था। अब यहां पर पौराणिक महत्व का और भी सामान मिल रहा है। कर्ण कोट टीले के ऐतिहासिक महत्व को समझने वाले सेफ्टी इंजीनियर ने अब यहां पर आंग्लो-सिख युद्ध के दौरान प्रयोग किए गए तोप के गोलों के खोल ढूंढे हैं। तोप के गोले अभी तक नष्ट नहीं हुए हैं। यह पूरी तरह से लोहे से बने हैं। संवाद
फतेहाबाद में भी हुआ था युद्ध
शोधार्थी एवं सेफ्टी इंजीनियर अजय कुमार ने बताया कि पटियाला रियासत के राजा दलीप सिंह की माता जिंदोबाई को अंग्रेजों ने कर्ण कोर्ट टीले के पास ही कैद किया हुुआ था। वर्ष 1848 में राजा दलीप सिंह के सिपहसालार यहां पर युद्ध के लिए पहुंच गए। यह युद्ध टोहाना के गांव चिल्लेवाली से आरंभ हुआ था और राजा दलीप सिंह की सेना उनके गांव तक पहुंच गई थी। यहां पर अंग्रेजों की बटालियन ने राजा दलीप सिंह की सेना पर तोप के गोलों से हमला किया था और दलीप सिंह की सेना यह युद्ध हार गई थी। अब यहां पर इस प्रकार के लोहे के गोले मिल रहे हैं। दो दिन पहले ही यहां पर उनको यह गोले मिले हैं। यह पूरी तरह लोहे से बने हैं। इसमें एक सुराख होता था, जिसमें बारूद भरा जाता था। आग लगाने के लिए बारूद की बत्ती लगाई जाती थी। इसके बाद इसे तोप में डाला जाता था और बत्ती को आग लगा दी जाती थी और गोला निशाने पर जाकर फट जाता था।
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प्राचीन काल में बच्चों के खिलौने भी मिल रहे
कर्ण कोट टीले से प्राचीन काल में बच्चों के खेलने के खिलौने जैसे पिट्ठू की मिट्टी से बनी ठिकरियां, मिट्टी से बने घोड़े व हाथीनुमा खिलौने भी यहां पर मिल रहे हैं। उनको सहेज के रखा हुआ है। अजय ने बताया कि कर्ण कोट टीला करीब नौ एकड़ में फैला हुआ है और बारिश के दौरान यहां पर अनेक अवशेष धरती से ऊपर आ जाते हैं।
प्राचीन काल की रेती व चूड़ियों के अवशेष भी मिले
अजय ने बताया कि किसी भी धातु को घिसने के लिए आजकल हम जिस लोहे की रेती का प्रयोग करते हैं, वैसे ही रेती के अवशेष यहां मिले हैं। पत्थर से बनी इस रेती पर नक्काशी के जरिये इस प्रकार दांत बनाए गए हैं, जो किसी भी धातु अथवा अन्य चीजों को काटने के काम आती होगी। इसके कुछ अवशेष यहां पर मिले हैं। यहां पर कांच की चूड़ियों के अवशेष भी मिले हैं। यह चूड़ियां इतनी मजबूत हैं कि इसे आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता।
गांव भट्टू बुआन के पास कर्ण कोट टीले से आंग्लो-सिख युद्ध के दौरान प्रयोग किए जाने वाले कुछ तोप के गोले व अन्य सामान मिला है। जल्द ही पुरातत्व विभाग की टीम गांव का दौरा करेगी और जो सामान मिला है, उसे अपने संरक्षण में ले लेगी।
-डॉ. बुनानी भट्टाचार्य, डिप्टी डायरेक्टर, पुरातत्व विभाग

फतेहाबाद के कर्ण कोट किले से मिला आंग्लो सिख युद्ध के दौरान प्रयोग किया गया तोप का गोला।- फोटो : Fatehabad

फतेहाबाद के कर्ण कोट टीले से मिली पत्थर की रेती।- फोटो : Fatehabad

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