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Fatehabad News: अवैध कटौती व लैब टेस्ट के नाम पर रुपये लेने पर रोष

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भट्टू कलां। भट्टू मंडी में व्यापारियों द्वारा किसानों की नरमा कपास आदि फसलों का तौल होने के बाद कटौती काटने का सिलसिला जारी है। जिस पर शनिवार को किसानों के सब्र का बांध टूट गया। किसानों ने व्यापारियों और मार्केट कमेटी के अधिकारियों व सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रकट करते हुए नारेबाजी की और मार्केट कमेटी के सचिव को ज्ञापन सौंपा।
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सूलीखेड़ा निवासी किसान रामसिंह, छिंदरपाल, सतबीर, शिवराम, सुरेंद्र, मदनलाल, महेंद्र, नरेंद्र, वीरेंद्र, श्रवण सिलगावा सहित कई किसानों ने बताया कि जब किसान नरमा कपास की फसल को मंडी में लेकर आते हैं तो उनके साथ नरमा कपास में प्रति क्विंटल के पीछे एक-एक किलोग्राम तक की अवैध कटौती की जाती है। जोकि सरेआम किसानों के साथ अवैध वसूली कटौती की जा रही है। इतना ही नहीं जब किसानों ने इसका विरोध किया तो उनकी नरमे की फसल को लेने से भी इंकार कर दिया। किसानों ने बताया कि उनकी सरसों, मूंगफली आदि जिंसों पर भी सैंपलिंग के नाम पर दर्जनों लोग उनकी ढ़ेरी में से पॉलिथीन भरकर सैंपल का हवाला देकर ले जाते हैं। जिससे किसान को काफी नुकसान होता है। वहीं जब उनकी कुछ सेंपलिंग लैब से आती है तो उक्त व्यापारियों की मनमर्जी से इस पर लोग से नमी व गुणवत्ता निकाल कर भाव तय किए जाते है। जोकि किसानों को गुमराह करते हुए उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं दी जाती।
किसी भी जींस का लैब में गुणवत्ता के आधार पर रेट निर्धारित होता है तो वह भी व्यापारी अपनी मनमर्जी से तय करते हैं। उसके रेट से भी कम कीमत पर उनकी फसलों को खरीदा जा रहा है। उनके साथ इस प्रकार मनमर्जी करके बहुत बड़ा धोखा किया जा रहा है। किसानों के समर्थन में आए किसान सभा जिला प्रधान विष्णुदत्त शर्मा ने मांग की है कि लैब मार्केट कमेटी कार्यालय में स्थापित कर उनकी फसलों का टेस्ट सरकारी कर्मचारी के अंतर्गत होना चाहिए। वहीं जो उनकी नरमा कपास की अवैध वसूली कटौती की जाती है उन्हें भी रोका जाए। यदि इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो किसान अपना आंदोलन तेज करेंगे। इस बारे में किसानों ने मंडी सुपरवाइजर राजबीर को उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा।
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इस बारे में मार्केट कमेटी सहायक सचिव महावीर सैनी से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि अगर कटौती की जा रही है तो भविष्य में ऐसा नहीं होगा। और उन किसानों को उनकी कटौती वापस दिलाई जाएगी। इसी प्रकार लैब की व्यवस्था सरकार की तरफ से हो उसके लिए हमने उच्च अधिकारियों को लिखा है। वही लैब के हिसाब से ही रेट होते है तो व्यापारियों को निर्देश दिए हैं कि वह उसी के हिसाब से बोली शुरू करें।
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