फतेहाबाद। मुख्यमंत्री नायब सैनी की सख्ती के बाद बाढ़ से बचाव के प्रबंधों को लेकर आखिरकार प्रशासन गंभीर हो गया है। अभी तक हाथ पर हाथ धरे बैठे अधिकारियों ने फील्ड में उतर कर हालात देखने शुरू कर दिए हैं। बुधवार को डीसी राहुल नरवाल ने पहले अधिकारियों के साथ अपने कैंप कार्यालय में बैठक की। इसके बाद डीसी ने अधिकारियों की टीम के साथ बाढ़ संभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
डीसी ने अयाल्की, रतिया-बुढ़लाडा रोड पर बने पुल, घासवा हेड, चिम्मो साइफन, शक्करपुरा रंगोई नाला, चांदपुरा साइफन, चांदपुरा बांध, रंगोई नाला साइफन, जोया नाला और बलियाला हेड का निरीक्षण किया। डीसी ने 30 जून तक बाढ़ बचाव तथा जलभराव की निकासी से संबंधित कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष जुलाई महीने में घग्गर नदी में आई बाढ़ के कारण जिले के 124 गांवों में जलभराव हो गया था। ढाणियों व मकानों में दरारें आ गई थीं। पूरी तरह जलभराव खत्म होने में 40 दिन से भी ज्यादा समय लगा था।
अधिकारियों को 18 दिन में युद्धस्तर पर करना होगा काम
डीसी ने सिंचाई विभाग, पंचायत विभाग, राजस्व विभाग, पीडब्ल्यूडी बीऐंडआर, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग व पुलिस अधिकारियों के साथ फील्ड में जाकर जायजा लेते हुए 30 जून तक बाढ़ प्रबंधों से संबंधित सारे काम पूरे करने के निर्देश दिए। अब मात्र 18 दिनों में युद्धस्तर पर अधिकारियों को काम करवाना होगा। जिले में मानसून के दस्तक देने के साथ से पहले रंगोई नाले की सफाई से लेकर तटबंधों को मजबूत करना होगा। डीसी के मुताबिक जाखल, रतिया, कुलां, फतेहाबाद व टोहाना के करीब 114 गांवों में बाढ़ का अधिक खतरा है। यहां उन्होंने संबंधित बीडीपीओ को रिंग बांध मजबूत करने के निर्देश दिए। जिले में उपलब्ध संसाधनों को भी तैयारी पर रखने के लिए कहा गया है। बाढ़ राहत के लिए लघु सचिवालय, रतिया तथा टोहाना में स्थापित किए गए कंट्रोल रूम को फिर से सक्रिय किया गया है।
पिछले साल की तबाही से उभर नहीं पाए किसान, मुआवजे के लिए दे रहे धरना
जिले में पिछले साल बाढ़ के कारण 92000 एकड़ में लगी धान, नरमा, ज्वार व पशुओं की चारे की फसल चौपट हो गई थी। किसान पिछले साल के बाढ़ के भयंकर मंजर को अभी तक भूल नहीं पाए हैं। जिन किसानों ने ज्यादा मार झेली वह अभी तक उभर नहीं पाए हैं। प्रशासन ने चार करोड़ रुपये से ज्यादा मुआवजा बांटने का दावा किया है। मगर इसके बावजूद जाखल क्षेत्र के किसान मुआवजा नहीं मिलने की शिकायतें कर रहे हैं। पिछले चार महीनों से जाखल उपतहसील कार्यालय में धरना देकर किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन का दावा- 30 जून तक कर लेंगे पूरी तैयारी
जिले में 13 ड्रेन हैं, जिनकी सफाई शुरू करवा दी गई है। घग्गर नदी में ज्यादा पाने आने पर रंगोई नाले में पानी डाला जाता है। इस नाले की क्षमता बढ़ाने पर काम किया गया है। रंगोई नाले की सफाई चल रही है। 30 जून तक यह सारा कार्य पूरा किया जाना है।
प्रशासन के पास बाढ़ प्रबंधों की सामग्री
- 13 डीजल चालित पंप सेट हैं।
- बिजली चालित 83 पंपसेट हैं।
- 39 वर्टिकल टरबाइन हैं।
- 26 किलोमीटर की पाइपलाइन उपलब्ध हैं।
कोट
जिले में बाढ़ संभावित क्षेत्रों का बुधवार को अधिकारियों के साथ दौरा किया गया है। अधिकारियों से कहा कि पिछली साल आई बाढ़ से सबक लें और जहां कमी महसूस की गई थी, उन्हें अब समय रहते दूर कर लिया जाए। इस काम में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
-राहुल नरवाल, डीसी, फतेहाबाद