फतेहाबाद। आजादी के अमृत महोत्सव पर एक ओर जहां हम हमारे शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहे हैं, वहीं फतेहाबाद जिले का एकमात्र धांगड़ ऐसा गांव हैं, जहां के 14 युवाओं ने महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह में भाग लिया और उनको अंग्रेजी हुकूमत ने लाहौर की जेल में छह माह कैद के दौरान कड़ी यातनाओं से गुजरना पड़ा। जेल से रिहा होने के बाद इन युवाओं ने 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया। आजादी के आंदोलन में अपना योगदान देने वाले ये युवा अब इस दुनिया में नहीं है। इनके निधन के साथ ही प्रशासन भी इनके योगदान को भूल चुका है। जिसकी टीस इनके परिजनों दिल में झलकती है।
नेशनल हाइवे पर मौजूद गांव धांगड़ के 14 युवाओं में से कई तो सिर्फ 12 से 17 साल के थे। इन्हें लाहौर की बोस्टल जेल में छह माह तक कैद रखा गया। इनमें गांव धांगड़ निवासी सहीराम पुत्र गोदूराम, धन्नाराम पुत्र गंगाराम, गणपत राम पुत्र सुखराम काजला, नत्थूराम पुत्र दौड़तीराम, हरलाल पुत्र रावतराम भादू, प्रेम नारायण पुत्र रामराज भादू , बगड़ावत पुत्र रतिराम, ताराचंद सेठी, हरीराम पुत्र हरसुख भादू, रणजीत सिंह पुत्र खेमाराम भादू, रामरत्न पुत्र मंगलाराम पूनिया, पोकरराम पुत्र चुन्नीराम मांझू, प्रेम नारायण पुत्र रामराज भादू, बीरबल पुत्र रामलाल भादू व शिवलाल पुत्र केसराराम शामिल हैं। संवाद
नमक आंदोलन व सविनय अवज्ञा आंदोलन में लिया था भाग
गांव धांगड़ के इन रणबांकुरों ने महात्मा गांधी ने जब 1930 में नमक व सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया तो इन्होंने भी इसमें बढ़ चढ़कर भाग लिया। आंदोलन के दौरान हिसार में 1932 में अंग्रेजी हुकूमत ने इनको गिरफ्तार कर लिया और लाहौर में छह माह तक जेल में बंद रखा। इनमें उस समय धन्नाराम मात्र 12 साल के थे। इसके अलावा रामरत्न 17, व रणजीत राम 16 तथा अन्यों की उम्र करीब 20 से 21 साल तक थी। इनको बोस्टल जेल लाहौर में रखा गया था। इसके बाद इन युवाओं ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भेंट किए थे ताम्र पत्र
1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने धांगड़ के इन वीरों को ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया था। पहले जब भी राष्ट्रीय पर्व मनाया जाता था, तो इन सभी को प्रशासन द्वारा बुलाया जाता था। अब इनके निधन के बाद प्रशासन भी इनको भूलने लगा है।
गांव में स्थापित गैलरी टूटी
इन वीरों की फोटो सहित एक गैलरी गांव के पंचायत भवन में वर्ष 2014 में स्थापित की गई थी। जिसे शरारती तत्वों ने तोड़ दिया है। इसके तोड़े जाने के बाद इसे ठीक नहीं करवाया गया है। वहीं गांव के गौरव पट्ट पर इनके नाम स्थापित हैं। देखरेख के अभाव में अब गौरव पट्ट भी टूटने के कगार पर है। हालांकि ई-दिशा केंद्र में इन सेनानियों की फोटो जरूर लगाई गई है।
प्रशासन द्वारा न बुलाने की टीस है परिवारों में
आजादी के आंदोलन में भाग लेने वाले सहीराम अविवाहित थे। उनके भतीजे कृष्ण खिचड़ ने बताया कि जब तक उनके चाचा जीवित रहे, उनको बुलाया जाता था, लेकिन अब उनके परिवार के किसी भी सदस्य को राष्ट्रीय पर्व के किसी भी मौके पर नहीं बुलाया जा रहा है।
सुबह अखबार सप्लाई कर कर रहे हैं गुजारा
सहीराम के भतीजे कृष्ण खिचड़ सुबह गांव में घर-घर व ढाणियों में जाकर अखबार डालने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके चाचा अविवाहित थे और उन्होंने अपनी जमीन भी उनके नाम कर दी थी। कृष्ण खिचड़ का कहना है कि हमें सरकार से और कुछ नहीं चाहिए, बस इतना जरूर है कि उनको कम से कम राष्ट्रीय पर्व पर तो याद किया जाए।
आठ साल बाद आई है याद
स्वतंत्रता सेनानी धन्नाराम के बेटे हनुमान ने बताया कि जब तक उनके पिता जीवित थे, उनको हर कार्यक्रम में बुलाया जाता था। उसके बाद उनकी माता को भी बुलाया जाने लगा। उनकी माता के देहांत के अब आठ साल बाद प्रशासन को याद आई है। हमारा गांव जिले में पहला ऐसा गांव हैं, जहां 14 लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के साथ मिलकर आंदोलनों में भाग लिया था। इस बार भी यह आमंत्रण इसलिए आया है, क्योंकि सभी ने मिलकर इसकी शिकायत डीसी को की थी।
हमारे पास जो लिस्ट आती है, उसी के अनुसार, स्वतंत्रता सेनानियों, हिंदी आंदोलन, कारगिल योद्धाओं व आपातकाल के दौरान जेल काटने वाले लोगों को स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस समारोह में बुलाया जाता है। अगर धांगड़ के योद्धाओं को नहीं बुलाया गया है तो उनको भी बुलाया जाएगा।
-राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद।
गांव धांगड़ के गौरव पट्ट अंकित गांव के शूरवीरों का नाम- फोटो : Fatehabad
नमक सत्याग्रह में भाग ले चुके सहीराम को मिला ताम्रपदक दिखाते उनके भतीजे कृष्ण कुमार- फोटो : Fatehabad