हरियाणा के फतेहाबाद के भूना क्षेत्र में न्यायिक दंडाधिकारी (प्रथम श्रेणी) की अदालत ने सोमवार को जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान गांव नहला में रोड जाम करने के मामले में 67 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत में लगातार आठ साल तक चले इस केस में छह अलग-अलग जजों ने सुनवाई की।
भूना थाने में 19 फरवरी 2016 को एसएचओ राम सिंह की शिकायत पर हिसार-भूना मार्ग को नहला गांव में अवरुद्ध करने के मामले में 67 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार के नेतृत्व में एसएचओ रामसिंह अपनी टीम के साथ हिसार रोड पर नहला गांव चौराहे पर पहुंचे तो आरक्षण की मांग को लेकर सैकड़ों लोगों की भीड़ ने सड़क पर पेड़ गिरा कर जाम लगा रखा था। बचाव पक्ष के वकील राजकुमार गोदारा ने बताया कि 67 आरोपियों में से 10 आरोपी भगोड़ा घोषित हो चुके हैं।
इस प्रकरण में तत्कालीन नायब तहसीलदार, कई एसएचओ, जिला उपायुक्त के रीडर और वन विभाग के कर्मचारियों सहित कुल 18 लोगों की गवाही हुई थी। सोमवार को फतेहाबाद की अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया। हालांकि, इससे पूर्व ढाणी गोपाल के पास सिरसा-चंडीगढ़ रोड जाम करने के आरोप में शामिल सभी आरोपियों को अदालत बरी कर चुकी है।