फतेहाबाद। फतेहाबाद की सरसों मंडी में आढ़तियों के मार्फत सरसों न खरीदकर सरकारी खरीद एजेंसी द्वारा सरसों की खरीद करने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों की सरसों की फसल एक तो समय पर नहीं बिक रही है, वहीं दूसरी ओर बारदाने के वजन के नाम पर उनको प्रति क्विंटल 400 ग्राम की चपत लगाई जा रही है।
यही नहीं सरसों मंडी में किसानों को स्वयं अपनी फसल की झराई करनी पड़ रही है और मंडी से मजदूर न मिलने के कारण अपने स्तर पर मजदूर लेकर आने पड़ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार ने एमएसपी पर खरीद की बात तो कह दी, लेकिन उनकी परेशानियों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। पहले फतेहाबाद जिले में भूना व भट्टूकलां मंडी ही सरसों की खरीद के लिए अधिकृत थी। फतेहाबाद के किसानों को अपनी सरसों की फसल बेचने के लिए भूना व भट्टूकलां जाना पड़ता था। इस बार सरकार ने फतेहाबाद की अनाज मंडी को भी सरसों की खरीद के लिए अधिकृत कर दिया। 15 मार्च से सरकार ने सरसों की सरकारी खरीद के आदेश दिए थे। सरसों को नैफेड ने हैफेड के माध्यम से खरीदना था। हैफेड ने भी इसके लिए कोऑपरेटिव सोसायटी को अधिकृत करके उसके माध्यम से सरसों की खरीद आरंभ की थी। नैफेड सरसों की खरीद के लिए हैफेड व कोऑपरेटिव सोसायटी को एक-एक फीसदी कमीशन दे रही है। यहां गौर लायक बात यह है कि आढ़तियों को सरसों की खरीद पर सवा फीसदी कमीशन मिलता था, लेकिन अब यह कमीशन दो फीसदी तक पहुंच गया है। संवाद
एक किलोग्राम बाट रखकर हो रही सरसों की कटौती
फतेहाबाद मार्केट कमेटी ने सरसों की खरीद के लिए मार्केट कमेटी की कॉलोनी के आगे लगे शैड को सरसों मंडी बनाया हुआ है, लेकिन यहां पर किसानों को बड़ी चपत लगाई जा रही है। सरसों की तुलाई बारदाने के वजन के हिसाब से होनी चाहिए, लेकिन उनकी सरसों की खरीद एक किलोग्राम बाट के हिसाब से होती है। आपको बता दें कि जूट का बारदाना पश्चिमी बंगाल से आता है, उस समय वह गीला होता है और उसका वजन 990 ग्राम माना जाता है। एजेंसियां व प्राइवेट परचेजर इसी वजन को एक बोरी के हिसाब से दिखाते हैं। जबकि बोरी सूख जाती है तो उसका वजन 800 ग्राम तक हो जाता है। नियमों के अनुसार, बारदाने के वजन के हिसाब से ही सरसों की कटौती होनी चाहिए, लेकिन एक किलोग्राम का अतिरिक्त बाट रखकर किसानों को प्रति क्विंटल 400 ग्राम की चपत लगाई जा रही है।
1800 रुपये दिहाड़ी पर ला रहे मजदूर, स्वयं कर रहे झराई
सरसों मंडी में हालात इतने खराब हैं कि किसानों को मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं। उनको 1800 रुपये दिहाड़ी पर अपने स्तर पर मजदूर लेकर आने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि मंडी में अपने स्तर पर मजदूरों की दिहाड़ी तो उनको देनी ही पड़ेगी, साथ ही बाद में सरकारी लेबर भी काटी जाएगी। उन्होंने बताया कि मंडी में पंखों से सरसों की झराई का काम भी उनको स्वयं करना पड़ रहा है। एक सप्ताह से उनकी फसल की बिक्री नहीं हो रही और ठेकेदार अपने लोगों की फसल तुरंत खरीद रहे हैं। मंडी में ना पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही बाथरूम की सुविधा है। उनको घर से खाना लेकर आना पड़ रहा है और स्वयं ही पीने के पानी के लिए कैंपर लेकर आ रहे हैं।
कोट
पिछले एक सप्ताह से मैं अनाज मंडी में अपनी सरसों की फसल लेकर आया हुआ हूं, लेकिन सरसों की खरीद नहीं हुई है। इसके अलावा सरसों मंडी में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारदाने के नाम पर सरसों की कटौती की जा रही है।
-सतपाल नेहरा, किसान मानावाली
अनाज मंडी में सरसों की झराई के लिए पंखों की कमी है और ना ही मजदूर हमें दिए गए हैं। मैं शनिवार को अपनी सरसों की फसल लेकर अनाज मंडी में आया हूं, लेकिन अभी तक सरसों की बोली नहीं हुई है। तीन पहले टोकन भी मिल गया, लेकिन खरीद नहीं हुई।
-शाम लाल, किसान नागपुर
सरसों मंडी में मजदूर नहीं मिल रहे। पहले आढ़तियों के मार्फत हमें मजदूर तो मिल जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। आज ही अपने स्तर पर मजदूर यूनियन से 1800 रुपये में दो मजदूर लेकर आया हूं, ताकि सरसों की झराई व सफाई का काम हो सके।
-भरत सिंह, किसान खाराखेड़ी
पिछले तीन दिनों से मैं सरसों की खरीद का इंतजार कर रहा हूं। ठेकेदार अपनी पसंद के लोगों की सरसों तो तुरंत खरीद लेते हैं, लेकिन उनकी सरसों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। तीन दिन से अपनी फसल बिकने में इंतजार में बैठा हूं। मंगलवार को तो इस मामले को लेकर मंडी में झगड़ा भी हो गया था।
-कुलदीप गढ़वाल, किसान भोडियाखेड़ा
सरसों मंडी में कुछ परेशानियां सामने आ रही हैं। इस मामले में मैंने डीएम हैफेड से बात भी की है। अनाज मंडी में सरसों की तुलाई के लिए बारदाने के हिसाब से ही तुलाई के आदेश जारी कर दिए गए थे, अगर अभी भी एक किलो का बाट रखकर तुलाई हो रही है तो इसकी जांच करवाई जाएगी।
-विकास सेतिया, सचिव, मार्केट कमेटी फतेहाबाद।