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27 गांवों में अभी भी भरा है पानी, बीमारियां फैलने की आशंका

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फतेहाबाद के गांव धांगड़ में खेत में जमा पानी व खराब हुई बाजरे की फसल। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। भूना के अलावा बारिश के कारण 27 गांवों में हुए जलभराव की स्थिति कई गांवों में जस की तस पड़ी हुई है, गांवों में हल्का-हल्का पानी ही निकला है। सबसे अधिक परेशानी सेमग्रस्त क्षेत्र के गांवों में है, जहां न तो ढाणियों से पानी निकला है और न ही गांवों से। इसके अलावा अन्य गांवों के खेतों में भी पानी की निकासी नहीं हो पाई है। जिले में पांच दिन हुई बारिश के कारण धान का 90 फीसदी व कपास का 98 फीसदी रकबा प्रभावित हुआ है। वहीं पशुओं में बीमारियों का भय भी पशुपालकों को सता रहा है। हालांकि पशुपालन विभाग इसके लिए पहले से तैयार है।
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बता दें कि फतेहाबाद में पांच दिन तक हुई बारिश के कारण 27 गांव जलभराव के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। इनमें फतेहाबाद खंड के गांव बड़ोपल, चिंदड़, चनकोठी व खुंभर, रतिया के गांव जांडवाला सोतर, हड़ोली, मढ़ व भरपूर, भूना के गांव दहमन, डूल्ट, गोरखपुर, नहला, मोचीवाली, जांडलीखुर्द, बैजलपुर, नाढ़ोड़ी, दिगोह, जांडलीकलां, चंद्रावल तथा कुलां के गांव दिवाना, गुल्लरवाल, धारसूलकलां, लहरियां, कानीखेड़ी, रहनखेड़ी, भोडी, रसूलपुर में एक से तीन फुट तक पानी भर गया था।
सेमग्रस्त इलाकों में हालात खराब
जिले के गांव बड़ोपल, चिंदड़, खाराखेड़ी, ठुईयां, रामसरा, ढाबीखुर्द, ढाबीकलां सेम ग्रस्त क्षेत्र माना जाता है। यहां पर हालात अभी भी खराब हैं और पानी ना तो खेतों से निकल पाया है और ना ही ढाणियों से। किसानों की फसल तो खराब हो ही चुकी है और अब उनको पशुओं में बीमारियां फैलने का भय बना हुआ है। गांव धांगड़ की ढाणियों की दीवारों में जलभराव के कारण दरारें पड़ने लगी हैं।
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धान का एक लाख 18 हजार 90 हेक्टेयर रकबा हुआ प्रभावित
जिले में इस बार एक लाख 31 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई थी। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पांच दिन हुई बारिश के कारण एक लाख 18 हजार 90 हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल प्रभावित हुई है। वहीं 59 हजार हेक्टयर में से नरमे का 57 हजार 800 हेक्टेयर रकबा प्रभावित हुआ है। धान के 1800 एकड़ रकबे व नरमे के 25400 एकड़ को 75 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है।
कोट
गांवों में 86 पंपसेटों के माध्यम से पानी की निकासी की जा रही है। प्रतिदिन 258 क्यूसेक पानी नहरों व खाली जगहों पर निकाला जा रहा है। उम्मीद है कि 10 अक्तूबर तक जिले के जलभराव प्रभावित गांवों से पानी निकाल दिया जाएगा।
-ओपी बिश्नोई, अधीक्षक अभियंता, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद
कोट
लगातार जलभराव के कारण पशुओं को बीमारियां हो सकती हैं। हमने हाल ही में छह गोशालाओं में स्प्रे का छिड़काव करवाया है। गांवों में जहां पानी अधिक है, वहां पशुपालन विभाग की टीमें काम कर रही हैं और पशुओं की जांच कर रही है। जलभराव के कारण पशुओं के खुर गलने व मच्छर जनित बीमारियां हो जाती हैं, जिसके लिए विभाग तैयार है और विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में दवाओं का स्टॉक है।
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-डॉ. सुखविंद्र, उपनिदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग
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