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व्यक्ति अपने झूठे अहंकार के वशीभूत होकर अपना सब कुछ गवा बैठता है : करूणा गिरी जी

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अमर उजाला ब्यूरो
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भूना।
बाबा राणाधीर मंदिर के प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक साध्वी महामंडलेश्वर करूणा गिरी ने कहा कि अहंकार व्यक्ति का सर्वनाश कर देता है और व्यक्ति अपने झूठे अहंकार के वशीभूत होकर अपना सब कुछ गवा बैठता है। कथा के दौरान श्री राम चंद्र, सीता व लक्ष्मण की मनमोहक झांकी निकाली गई। करूणागिरी जी ने फरमाया कि रावण तीनों वेदों का टीकाकार पंडित और विद्वान था, जिसने तीनों वेदों पर अपनी टिप्पणी तक कर डाली थी। सोने की लंका थी और सवा लाख संतान थी। किंतु उसने अपने अहंकार में आकर सीता माता का अपहृरण किया और सोने की लंका सहित सारा साम्राज्य गवा लिया। माता जी ने फरमाया कि इंसान को अपने जीवन मेें कुछ ऐसे कर्म भी करने चाहिए, जो दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन जाएं। परोपकार को ही अपना सच्चा धर्म मानते हुए सृष्टि की सेवा में हमेशा तत्पर रहना चाहिए। इस अवसर पर बाबा राणाधीर सेवा समिति के प्रधान ओम प्रकाश धारनियां, हरविंद्र बागड़ी, अनिल सोनी, रमेश बंसल, नंद लाल कंबोज, मंगलसैन, दिनेश जैन, सुरेश कंबोज, कैलाश बंसल, अलोक बंसल, अमित लीखा, रामकुमार चांगल, कैलाश बंसल, दीपक चांगल, अशोक एहलावादी, टोनी गिरधर, बलजीत सोनी, विरेंद्र शर्मा, भजन कंबोज, राकेश मदान, रमेश कंबोज, राजू गिरधर भी मौजूद थे।
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