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590 करोड़ घोटाला: पंचकूला निगम में 22 बार हुई सेंधमारी, कई बड़े ट्रांजेक्शन से सरकारी खाते खाली किए गए

Sun, 12 Jul 2026 08:42 AM IST
Naveen माई सिटी रिपोर्टर, पंचकूला (हरियाणा)

सार

चार्जशीट के अनुसार कथित घोटाले को अंजाम देने के लिए आयुक्त और वरिष्ठ लेखा अधिकारी समेत उच्च अधिकारियों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों वाले चेकों का उपयोग किया गया। रकम सीधे ट्रांसफर करने के बजाय पहले बैंक के जनरल लेजर (जीएल) अकाउंट में डाली जाती थी।
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पंचकूला नगर निगम - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (सेक्टर-32 शाखा) से जुड़े फर्जीवाड़े की परतें सीबीआई की चार्जशीट में सामने आई हैं। चार्जशीट के अनुसार नगर निगम पंचकूला और नगर परिषद कालका के खातों से करोड़ों रुपये की निकासी की गई। सरकारी खजाने से धन निकालने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों, बैंकिंग प्रक्रियाओं में हेरफेर और तकनीकी खामियों का इस्तेमाल किया गया।

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नगर निगम पंचकूला का खाता संख्या 10252520450 जांच का प्रमुख केंद्र रहा। 29 अक्तूबर 2025 को खोला गया यह खाता कुछ ही महीनों में संदिग्ध लेनदेन का माध्यम बन गया। 27 नवंबर 2025 को खाते से पहली बार 10 करोड़ रुपये निकाले गए। इसके बाद कुल 22 बार विभिन्न ट्रांजेक्शन के जरिए सरकारी धन को निजी फर्मों के खातों में स्थानांतरित किया गया।

छह बड़े ट्रांजेक्शन

दिनांक राशि मुख्य विवरण
  • 27.11.2025 10 करोड़ रुपये चेक नंबर 000006 के जरिए पहला बड़ा ट्रांजेक्शन
  • 29.11.2025 10 करोड़ रुपये चेक नंबर 000005 के जरिए राशि दुर्गा फूड्स और आर.के. एंटरप्राइज के खातों में भेजी गई
  • 02.12.2025 20 करोड़ रुपये चेक नंबर 000001 के जरिए दुर्गा फूड्स, त्रिपाठी फूड्स, गर्ग ओवरसीज सहित कई खातों में राशि भेजी गई
  • 06.12.2025 20 करोड़ रुपये चेक नंबर 000004 के जरिए विभिन्न फर्मों के खातों में धनराशि ट्रांसफर की गई
  • 12.12.2025 20 करोड़ रुपये चेक नंबर 000002 के जरिए कई निजी खातों में रकम भेजी गई
एक डेबिट नोट से निकाले गए करोड़ों रुपये
नगर परिषद कालका का खाता भी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कथित सेंधमारी का शिकार बना। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार एक डेबिट नोट के जरिए 18.46 करोड़ रुपये की राशि सरकारी खाते से निकाल ली गई। नगर परिषद कालका का खाता नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में खोला गया था।

आरोप है कि 20 जनवरी 2026 को दोपहर 2:41 बजे चेक नंबर 000071 का इस्तेमाल कर 18.46 करोड़ रुपये की राशि एक साथ निकाली गई। चार्जशीट के अनुसार इस ट्रांजेक्शन को अंजाम देने के लिए एक फर्जी डेबिट नोट (मेमो नंबर एमसी/केएलके/नील) का इस्तेमाल किया गया, जिस पर नगर परिषद के अधिकारियों के कथित फर्जी हस्ताक्षर थे।

कहां गया कालका नगर परिषद का पैसा
धोखाधड़ी से निकाली गई राशि को आरटीजीएस के माध्यम से चार अलग-अलग निजी कंपनियों के खातों में स्थानांतरित किया गया।
  • मन्नत कांट्रैक्टर (येस बैंक) : 5.92 करोड़ रुपये
  • दिशा ट्रेडर (येस बैंक) : 6.92 करोड़ रुपये
  • एसआरआर प्लानिंग गुरुस (आरबीएल बैंक) : 4.00 करोड़ रुपये
  • दिव्या हाई-टेक बिल्ड केयर (पीएनबी) : 1.62 करोड़ रुपये
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चार्जशीट के मुताबिक घोटाले का तरीका

चार्जशीट के अनुसार कथित घोटाले को अंजाम देने के लिए आयुक्त और वरिष्ठ लेखा अधिकारी समेत उच्च अधिकारियों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों वाले चेकों का उपयोग किया गया। रकम सीधे ट्रांसफर करने के बजाय पहले बैंक के जनरल लेजर (जीएल) अकाउंट में डाली जाती थी, ताकि सिस्टम से कोई अलर्ट जारी न हो। कई मामलों में बिना किसी वास्तविक चेक के केवल फर्जी डेबिट नोट के आधार पर ही करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए।
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