हरियाणा में बच्चों और उनके अभिभावकों के मन में आयरन की गोलियों को लेकर दशहत फैल चुकी है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित लक्ष्य 72 हजार की तुलना में सोमवार को मात्र 26 हजार 384 बच्चों ने ही आयरन की गोलियां खाईं। इन गोलियों को खाने के बाद 163 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। इनका इलाज स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जा रहा है।
आयरन की गोली खाने से गांव पिंजुपुरा के सरकारी स्कूल के 19 और खरक पांडवा के सरकारी स्कूल के 5 बच्चों की हालत बिगड़ गई है। गांव पिंजुपुरा के सरकारी स्कूल के 19 बच्चों को अस्पताल लाया गया। इनमें से 11 बच्चों को प्राथमिक चिकित्सा देकर वापस घर भेज दिया गया।
पूंडरी के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में भी आयरन की गोलियां खाने से 14 छात्राओं का स्वास्थ्य बिगड़ गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोमवार को पूंडरी के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में एक शिविर लगाकर 227 छात्राओं को आयरन की गोलियां दी गई।
‘पिछले सप्ताह इस अभियान के तहत जिला में कुल 64 हजार बच्चों में से 41 बच्चों ने गोली खाने के बाद पेट दर्द व उल्टी आदि की शिकायत की, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद आराम आ गया था। सोमवार को इस अभियान के तहत पूरे जिला में 40 बच्चों में ऐसी समस्या पाए जाने की शिकायत प्राप्त हुई, जिन्हें सरकारी चिकित्सालयों में उपचार के बाद उन्हें आराम आ गया। यह एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है तथा बहुत ही कम बच्चों मे इस प्रकार की शिकायत मिलने के मामले सामने आये हैं।’
- डा. विनोद गुप्ता, सिविल सर्जन अंबाला
‘प्रदेश में 17 लाख बच्चों में से यदि जिन कुछ बच्चों ने पेट में दर्द की शिकायत की है। सरकार इस बारें में पूरी तरह से गंभीर है और इस बात के प्रयास किये जा रहे है कि भविष्य में ऐसी समस्या बच्चों को न हो। बच्चों के भौतिक व शारीरिक विकास के लिये एनीमिया रोग दूर करना अति आवश्यक है।’
- नीलम प्रदीप कासनी, मंडलायुक्त