गांव अहमदपुर में 13 अक्तूबर को बच्चे अरुण की हत्या के मामले का पुलिस ने
खुलासा कर दिया है। बच्चे की हत्या महज इस वजह से की गई थी क्योंकि उसकी
मां ने रिश्ते में लगने वाली ननद को उसका कोई भाई न होने का ताना मारा था।
पूछताछ
में खुलासा हुआ कि युवती सोमा ने अपनी मां राम प्यारी के साथ मिलकर ही इस
कुकृत्य को अंजाम दिया। पुलिस दोनों आरोपियों को वीरवार को अदालत में पेश
करेगी।
एएसपी राजेंद्र कुमार मीणा ने थाना शहर में आयोजित पत्रकार
वार्ता में बताया कि इस हत्या को नजदीकी रिश्तेदार अरुण की बुआ सोमा ने ही
अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि अहमदपुर निवासी परमजीत उर्फ पम्मी का साढे़
तीन वर्षीय पुत्र अरुण रविवार शाम को लापता हो गया। सोमवार सुबह एक महिला
ने भजन सिंह की छत पर एक प्लास्टिक थैला देखा, जिसमें अरुण का शव था।
मीणा
ने बताया कि सबसे पहले पुलिस ने बैग को ही सबूत माना। जिस कंपनी की खल का
बैग था उसको आधार मानकर पुलिस ने हर घर में ऐसे बैग की तलाश की जो उन्हें
पड़ोसी और परमजीत के नजदीकी रिश्तेदार भजनलाल के घर ही मिला। वहां तूड़ी का
कमरा भी था क्योंकि बच्चे के शव पर तूड़ी भी लगी हुई थी, जिससे कयास लगाया
जा रहा था कि पहले बच्चे के शव को तूड़ी में दबाया गया था।
यूं मारा था मासूम को
जांच
में खुलासा हुआ कि सोमा ने पहले तो अरुण का गला दबाया और इसके बाद उसने
कस्सी से वार कर उसे मार डाला। इस घटना को जब सोमा की मां रामप्यारी को पता
चला तो उसने उसका साथ देते हुए बच्चे के शव को तूड़ी में दबा दिया। बाद
में उसे छत पर फेंक दिया।
इस वजह से थी रंजिश
पुलिस ने
बताया कि बताया कि रामप्यारी परमजीत की मामी है। रामप्यारी की सोमा सहित
चार बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है। ऐेसे में अरुण की मां सोमा को ताना
मारा करती थी कि उनका तो वंश नहीं चल पाएगा। सोमा ऐसा ताना मारे जाने से
नाराज थी। इन्हीं तानों से तंग आकर उसने इस घटना को अंजाम दिया।