चरखी दादरी। सामूहिक पशुधन बीमा योजना पशुपालकों को जोखिम की चिंता से मुक्त कर सकती है और बीमा नहीं करवाने वालों को यह गलती आपदा के समय भारी भी पड़ सकती है। इसका जीता जागता उदाहरण पिछले दिनों रावलधी में हुई आग की घटना है। ऐसे में सभी पशुपालक अपने पशुओं का बीमा जरूर करवाएं। उक्त अपनी उपायुक्त मनदीप कौर ने की।
उन्होंने कहा है कि केवल नाम मात्र की राशि में सामूहिक पशुधन बीमा योजना के तहत अपने पशुओं को आपदा से मुक्त किया जा सकता है और दुर्घटना होने पर पशुपालक के नुकसान की भरपाई हो सकती है। बीमा न करवाने पर पशुपालकों को बड़ी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। रावलधी के पशुपालक ने अपने पशुओं का बीमा नहीं करवाया हुआ था, जिसके कारण उसे बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। ऐसे में सभी पशुपालक सरकार की योजना का लाभ लेते हुए अपने प्रत्येक पशु का बीमा जरूर करवाएं।
उन्होंने बताया कि पशुपालक केवल 25 से 300 रुपये का प्रीमियम देकर अपने बड़े पशुओं जैसे गाय, भैंस के साथ-साथ छोटे पशुओं का भी बीमा करवा सकते हैं। वहीं, गोशालाएं भी पांच पशुओं का बीमा करा सकती हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन व प्रदेश सरकार के साझा कार्यक्रम के अनुसार चलाई गई इस योजना में पिछले तीन वर्षो में लाखों पशुपालकों ने अपने पशुओं का बीमा करवाया है, जोकि एक रिकाॅर्ड है। पशुओं की अचानक मौत होने पर मिलने वाली आर्थिक मदद के रूप में अब तक करोड़ों रुपये से अधिक की राशि बीमा क्लेम में दी जा चुकी है।
- इन दो वर्गों में होगा पशुओं का बीमा
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डाॅ. जसवंत जून ने बताया कि नई बीमा पालिसी के अनुसार पशुओं का दो प्रकार से वर्गीकरण किया गया है, जिसमें बड़े-छोटे पशु शामिल रहेंगे। बड़े पशुओं में गाय, भैस, झोटा, सांड, घोड़ा, ऊंट, खच्चर, बैल आदि शामिल हैं, जबकि छोटे पशुओं में भेड़, बकरी व खरगोश का बीमा करवा सकते हैं। हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड की ओर से पशुओं का एक वर्ष का बीमा होगा, जिसमें बड़े पशुओं के लिए 100 रुपये से लेकर 300 रुपये तक प्रीमियम राशि देकर दुग्ध व श्रेणी अनुसार बीमा होगा, जबकि छोटे जानवरों के लिए मात्र 25 रुपये खर्च करने होंगे। यदि पशुपालक चाहे तो आगामी तीन वर्ष के लिए बीमा करवा सकता है।
- दुर्घटना में मृत्यु होने पर मिलेगा बीमा क्लेम
योजना के अनुसार पशु की आकस्मिक या दुर्घटना में हुई मौत को कवर किया जाता है। बीमा होने के 21 दिन बाद यह योजना लागू होती है। हालांकि पशु चोरी होने पर कोई क्लेम नहीं होगा। एक पशुपालक बड़े पशुओं की दूध क्षमता एवं आयु के आधार पर 40 हजार से लेकर अधिकतम 90 हजार रुपये तक, जबकि छोटे पशुओं या जानवरों की मौत पर अधिकतम 10 हजार से 20 हजार रुपये क्लेम राशि का दावा पशु चिकित्सक की रिपोर्ट अनुसार कर सकेगा।