चरखी दादरी। उपायुक्त राहुल नरवाल ने बताया कि रबी फसलों की बिजाई का कार्य शुरू हो गया है। इस दौरान किसानों को दो मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए। पहला बीज और दूसरा उर्वरक। अगर बीज का चुनाव सही है लेकिन सही उर्वरक का प्रयोग नहीं किया तो यह फसल की उत्पादन क्षमता पर भी प्रभाव डालता है। किसान डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के बजाय सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) या नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम (एनपीके) का प्रयोग करें।
उपायुक्त ने बताया कि सरसों एक तिलहन फसल है, इसलिए इसके बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को एसएसपी खाद का प्रयोग करना चाहिए। बीज बुवाई से पूर्व एसएसपी का प्रयोग पौधे की उत्पादन क्षमता और फसल की गुणवत्ता की बढ़ोतरी में भी सहायक सिद्ध होता है। गेहूं के दाने का आकार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एनपीके का प्रयोग कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि किसान आज भी सरसों और गेहूं की बुवाई के लिए डीएपी खाद पर निर्भर हैं जबकि बाजार में इसकी तुलना में कम दाम पर बेहतर विकल्प उपलब्ध है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. जितेंद्र अहलावत ने बताया कि किसान सरसों की बिजाई के लिए एक एकड़ में 50 किलो डीएपी यानी एक कट्टा खाद का प्रयोग करता है, जिसमें 46 प्रतिशत फास्फेट और 18 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। यह खाद जमीन में जल्दी घुलनशील होती है। इसलिए बीज के अंकुरण के समय पौधे को इसका कम लाभ मिलता है।