बाढड़ा। नारी ने हमेशा अपने अबला स्वरूप को स्वीकार किया है। उसे अबला नहीं सबला बनना होगा। इससे जहां शोषण से बचा जा सकेगा, नई पीढ़ी को आदर्शवान बनाते हुए संस्कारित किया जा सकेगा। जहां नारी का सम्मान नहीं वहां विनाश होता है। सर्वहित साधना न्यास की ओर से राजकीय महिला महाविद्यालय में वीरवार को आयोजित नारी सशक्तीकरण विषय पर आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता बाेलते हुए स्वामी सच्चिदानंद ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की जैसी सोच होती है वह उसी प्रकृति का बन जाता है। समाज भी उसे उसी स्वरूप में देखने व व्यवहार करने लगता है। नारी मानव समाज की वह कड़ी है जिसके बलबूते संसार टिका हुआ है। समाज को संस्कार देने का भी काम उसी का है। उन्हें अपना महत्व स्वीकार करते हुए पूरी दृढ़ता के साथ आगे आना होगा।
इस अवसर पर प्रोफेसर जितेंद्र कुमार, प्रोफेसर तस्वीर,आनंद, मुकेश, सोनू, प्रदीप, राकेश, प्रोफेसर अनीता मीना आदि उपस्थिति रहे।