2016 में महिलाओं के लिए बसों को चलाने का प्रशिक्षण परिवहन विभाग ने शुरू किया
हैवी लाइसेंस लेकर महिलाएं निजी संस्थाओं में नौकरी करने के लिए मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। रोडवेज बसों को चलाने का प्रशिक्षण ले चुकीं महिलाओं के लिए सरकार ने अब तक कोई पद नहीं निकाले हैं। रोजगार नहीं मिलने से हैवी लाइसेंस प्राप्त महिलाएं भरण-पोषण के लिए निजी संस्थाओं के अलावा वार्ड सर्वेंट की नौकरी करने के लिए मजबूर हो रही हैं। महिलाओंं ने सरकार से चालक पद पर भर्ती करने की मांग की है। ताकि, वे आत्भनिर्भर बन सकें। महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ हाथ बंटाकर हर कार्य को साझा करने का प्रयास कर रही हैं। बात चाहे सेना में भर्ती की हो या फिर वाहन चलाने की। महिलाएं हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने में पीछे नहीं हैं।
ऐसा ही परिवहन विभाग के चालक प्रशिक्षण केंद्र में देखने को मिला है। परिवहन विभाग ने वर्ष 2013 में बस चालक प्रशिक्षण केंद्र खोला। ताकि, हैवी लाइसेंस बनवाने के लिए अन्य जिलों में नहीं जाना पड़े। विभाग ने जिले की महिलाओं का प्रशिक्षण के प्रति रुझान देखते हुए तीन साल बाद वर्ष 2016 में महिलाओं के लिए भी प्रशिक्षण के दरवाजे खोल दिए।
महिला प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ होने के बाद से जिले में 67 महिलाओं ने हैवी लाइसेंस बनवाए हैं। 35 दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। आज तक सरकार ने महिला चालक पद पर कोई भर्ती नहीं की है। इसके चलते महिलाओं में मायूसी और निराशा है।
35 दिन की होती है ट्रेनिंग
रोडवेज प्रशिक्षण प्रभारी विजय यादव ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए एक बस पर 15 प्रशिक्षुओं को भेजा जाता है। इनके साथ एक अनुभवी चालक होता है। प्रशिक्षक बस चलाने की बारीकियों को सिखाता है। 35 दिन तक प्रशिक्षण दिया जाता है।
भर्ती निकले तो करें आवेदन
स्थानीय बस ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षण ले चुकीं कविता सांगवान, प्रिया देवी व महिमा ने बताया कि सरकार ने अब तक महिलाओं के लिए चालक के रिक्त पद विज्ञापित नहीं किए हैं। उन्होंने बताया कि महंगाई के चलते बच्चों की पढ़ाई के साथ अन्य घरेलू खर्चे बहुत ही अधिक हो जाते हैं। ऐसे में पति का हाथ बंटाने के लिए रोडवेज से प्रशिक्षण लेकर हैवी लाइसेंस बनवाया है।
20 हजार लोग ले चुके हैं प्रशिक्षण
संस्थान प्रभारी ने बताया कि चालक प्रशिक्षण केंद्र से 20 हजार लोग प्रशिक्षण ले चुके हैं। प्रशिक्षण के बाद लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। शर्मिला, अश्वनी और ज्योति यहां से प्रशिक्षण लेने के बाद दिल्ली डीटीसी में चालक के पद पर कार्यरत हैं। वर्सन:
हमारे ट्रेनिंग सेंटर से 67 महिलाएं प्रशिक्षण ले चुकीं है। अब वे किसी भी संस्थान की बसें चलाने के लिए आवेदन कर सकती हैं।
-विजय यादव, प्रशिक्षण केंद्र प्रभारी,
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रोडवेज बस चलाने का प्रशिक्षण लेती महिला। संवाद