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Charkhi Dadri News: मूंग में सफेद मक्खी का प्रकोप

Fri, 13 Sep 2024 03:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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पौधे से रस चूसती है सफेद मक्खी, दो बार नलाई व गुड़ाई रहेगी फायदेमंद
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संवाद न्यूज एजेंसी

चरखी दादरी। लगातार बादल छाए रहने और पूर्वी हवा चलने की वजह से खरीफ सीजन की दलहन की फसल मूंग रोगों की चपेट में आ गई है। मूंग की फसल में सफेद मक्खी का प्रकोप बढ़ गया है। इसका पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो समय रहते किसानों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

जिले में 500 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बिजाई की गई थी। इसमें सफेद मक्खी का प्रकोप बना है। यह मक्खी खेत में अनावश्यक रूप से अपने आप उगे खरपतवार में ज्यादा पाई जाती है। बाद में यह फसली पौधे को जकड़ में ले लेती है। यह मक्खी मूंंग के पौधे से रस चूस लेती है। इससे पौधे को पूरी खुराक नहीं मिल पाती है। पौधा धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। पत्तियां भी सूखने लगती हैं। पौधे का विकास एवं वृद्धि रुक जाती है। ऐसे में औसत पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
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-नलाई व गुड़ाई से खत्म होगा खर-पतवार

मूंग की फसल में जरूरत के अनुसार दो बार नलाई-गुड़ाई करनी चाहिए ताकि खरपतपवार खत्म हो जाएं। खर-पतवार के पौधों में विभिन्न प्रकार के कीट एवं रोग बढ़ते हैं। ये बाद में फसली पौधों पर हमला करने लगते हैं। इसके लिए नलाई-गुड़ाई करके खेत को साफ-सुथरा बनाए रखें। खेत में केवल मूंग का पौधा ही दिखाई देना चाहिए।

- रोग के खात्मे के लिए ये करें किसान
सफेद मक्खी के लिए मैलाथियान और रोगोर के अलावा निमारिन दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। इन दवाओं का पानी के घोल में छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। जब मूंग की कटाई कर दी जाती है तो उस समय पौधे से झड़ने वाले पत्तों से अच्छी खाद मिलती है। पत्तों से जमीन को नाइट्रोजन, फास्फोरस और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है। मूंग की कटाई के बाद खेत की जुताई कर देनी चाहिए। इससे पत्तों का मिश्रण मिट्टी में हो जाता है।
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वर्सन:
मूंग की फसल को रोगों से बचाना चाहिए। खेत में खर-पतवार नहीं होनी चाहिए। सफेद मक्खी मूंग की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। इसके लिए दवा का छिड़काव करना जरूरी है। लगातार बादल छाए रहने की वजह से यह रोग बढ़ता है।

-डॉ. जितेंद्र सिहाग, खंड कृषि अधिकारी



फोटो-19
दादरी क्षेत्र के एक खेत में मूंग की फसल। संवाद
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